Privacy Policy | About Us | Contact Us

नया हरियाणा

रविवार, 16 दिसंबर 2018

पहला पन्‍ना English सर्वे लोकप्रिय हरियाणा चुनाव राजनीति अपना हरियाणा देश शख्सियत वीडियो आपकी बात सोशल मीडिया मनोरंजन गपशप

सरकार ने सभी 510 परमिट करोड़पति ऑपरेटरों को ही दिए

धनपत सिंह का कहना है कि रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के आरोप बेमानी हैं.

Haryana Government, transport minister Krishna Panwar, bus of roadways, 510 permits, millionaire operator, additional chief secretary of the transport department, Dhanpat Singh, naya haryana, नया हरियाणा

29 नवंबर 2018

नया हरियाणा

पिछले दिनों हरियाणा रोडवेज के कर्मचारियों द्वारा रोडवेज को के निजीकरण को लेकर हड़ताल हुई थी. जिसमें कर्मचारियों का कहना था कि किलोमीटर स्कीम के माध्यम से सरकार हरियाणा रोडवेज  का निजीकरण कर रही है. जबकि सरकार की तरफ से कहा गया था कि यह निजीकरण नहीं है बल्कि आसपास के सभी राज्यों ने इस स्कीम के तहत बसें ली है. जिसमें कंडक्टर सरकारी होगा और ड्राइवर प्राइवेट प्लेयर का होगा.
परिवहन विभाग की किलोमीटर स्कीम को लेकर रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी ने खुलासा करते हुए कहा कि सरकार ने सभी 510 परमिट करोड़पति ऑपरेटरों को ही दिए हैं. जिन 49 निजी ऑपरेटरों की बसें हायर की गई हैं उनमें से एक भी छोटा या नया ऑपरेटर नहीं है. जिसे रोजगार मिलने जा रहा हो.  सभी बड़े ऑपरेटर हैं पहले से बसें चला रहे हैं. विभाग ने कम से कम पांच बस वाले ऑपरेटर के लिए ही किलोमीटर स्कीम के टेंडर में भाग लेने की शर्त लगाकर एक दो बस वालों को पहले ही बाहर कर दिया था. एक नई बस कंप्लीट हो कर 25 से 30 लाख रुपए की पड़ती है. ऐसे में जिसके पास पहले से 5 बसें होंगी वे कम से कम ₹10करोड़ से ऊपर का ट्रांसपोर्ट होगा.
परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव धनपत सिंह का कहना है कि रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के आरोप बेमानी हैं. हायर की गई बसों से परिवहन विभाग को कम से कम ₹5 प्रति किलो मीटर का फायदा होगा. विभाग अपना पक्ष मजबूती से हाई कोर्ट में रखेगा. 
गौरतलब है कि 29 नवंबर को हाईकोर्ट में रोडवेज कर्मचारियों से जुड़े मामले को लेकर अहम सुनवाई होनी है. आंकड़ों के साथ कमेटी अपना पक्ष शपथ पत्र के माध्यम से 22 नवंबर को हाई कोर्ट में जमा करा चुकी है. जनहित मामले की याचिका के दौरान पेश तथ्यों के आधार पर अगर हाईकोर्ट स्कीम पर स्टे नहीं लगाता है तो कमेटी की ओर से वीरवार को ही नई याचिका दायर की जाएगी.

तालमेल कमेटी ने हाई कोर्ट को बताया कि
रोडवेज के कुल व्यय का डीजल पर 30% से भी कम खर्च हो रहा है, जबकि हायर की जाने वाली बसों को डीजल खर्च पर 6 फ़ीसदी देंगे. यह मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है. रोडवेज बस पर औसत खर्च 47.57 रु प्रति किलोमीटर आता है हायर बसों पर 52.52 रु खर्च आएगा. रोडवेज बसों की औसत कमाई 26.19 रु प्रति किलोमीटर है. विभाग ने निजी बसों के साथ 36 रु प्रति किलोमीटर से अधिक का एग्रीमेंट किया है. इसमें घाटा है. निजी बसों के लिए रोड टैक्स मात्र ₹12000 है जबकि रोडवेज के ₹72000 है. बसों को विभाग ने 10 साल तक चलाने का एग्रीमेंट किया है जबकि मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार 8 साल के बाद बच्चे सड़क पर नहीं बढ़ाई जा सकती. निजी बसों को 300 किलोमीटर सफर रोजाना तय करना होगा चाहे कमाई जितने भी हो इससे भी विभाग को वित्तीय चपत लगेगी. इसका प्रति किलोमीटर प्रदान की जाने वाली राशि पर कोई असर नहीं पड़ेगा.


बाकी समाचार