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शनिवार, 15 दिसंबर 2018

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आत्मा से परमात्मा तक का सफर है शिक्षा : रामबिलास शर्मा

सिंधु संस्थानों के संस्थापक दिवंगत चौ.मित्रसेन आर्य को नमन करते हुए रामबिलास शर्मा ने कहा कि वे एक सैल्फ मेड महापुरूष थे।

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24 नवंबर 2018

नया हरियाणा

हरियाणा के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने स्कूली बच्चों का आह्वïन करते हुए कहा कि वे सब कुछ पढ़े लेकिन हिन्दुस्तान को पढऩा न भूले।  शर्मा आज देर सायं महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के टेगौर ऑडिटोरियम में आयोजित इंडस पब्लिक स्कूल रोहतक के वार्षिक समारोह में बतौर मुख्यअतिथि उपस्थित स्कूली छात्राओं, अभिभावकों व स्कूल स्टॉफ को सम्बोधित कर रहे थे। 

उन्होंने बच्चों से कहा कि वे किसी भी भाषा के साहित्य को पढ़े लेकिन साथ में मुंशी प्रेमचंद के गोदान को जरूर पढ़े। उन्होंने शिक्षा को आत्मा से परमात्मा तक का सफर बताया और कहा कि अध्यापन व सीखना एक अनंत प्रक्रिया है. जो लगातार चलती रहती है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत की शिक्षा, संस्कार व संस्कृति की गुणवत्ता सर्वश्रेष्ठï है। उन्होंने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा किए गए एक सर्वे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस संस्था ने 50 हजार लोगों का सर्वे किया था, जिसमें पाया गया कि भारत के संस्थानों से डॉक्टरी की उपाधि प्राप्त करने वाले चिकित्सकों की क्षमता दूसरे देशों के चिकित्सकों से कही ज्यादा है। इसी प्रकार से भारतीय इंजीनियरों ने विदेशों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। 

अध्यापन का कार्य व्यवसाय न होकर समर्पण होने की बात कहते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें अध्यापक समर्पण भाव से कार्य करते हुए बच्चों को राष्ट-निर्माण के लिए तैयार करता है। उन्होंने पूर्व राष्टपति ए.पी.जे.अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वे राष्टपति भवन में आए थे तो उनके हाथ में एक अटैची थी और कार्यकाल पूरा होने के बाद जब वापिस गए तो तब भी उनके हाथ में अटैची ही थी। उन्होंने कहा कि जब एक मीडियाकर्मी ने अब्दुल कलाम से सवाल किया कि क्या वे स्वयं को पूर्व राष्टपति कहलवाना पसंद करेंगे तो उन्होंने जवाब दिया था कि मैं एक प्रोफेसर था और आज भी प्रोफेसर हूंं। शर्मा ने कहा कि अब्दुल कलाम का प्राण भी क्लास रूम में ही निकला था। 

सिंधु संस्थानों के संस्थापक दिवंगत चौ.मित्रसेन आर्य को नमन करते हुए रामबिलास शर्मा ने कहा कि वे एक सैल्फ मेड महापुरूष थे। वे जहां भी गए अपने साथ गुरूकुल, यज्ञशाला, संस्कार व गाय को भी साथ लेकर गए। उन्होंने कहा कि स्वामी ओमानंद सरस्वती व चौ.मित्रसेन आर्य के चरणों में उन्होंने अपने जीवन का लंबा समय बिताया है और उनसे प्रेरणा ली है। उन्होंने यह भी कहा कि इंडस पब्लिक स्कूल रोहतक के छात्र-छात्राओं का न केवल बौद्घिक स्तर मजबूत है बल्कि आत्मविश्वास से भी ये छात्र-छात्राएं परिपूर्ण है। इसके लिए उन्होंने सिंधु शिक्षण संस्थान की चेयरपर्सन श्रीमती एकता सिंधु को बधाई भी दी। 

शिक्षा मंत्री ने इंडस पब्लिक स्कूल के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को पुरस्कार भी प्रदान किए। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। बाद में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाया है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में निजी स्कूलों को छोडक़र बच्चे सरकारी स्कूलों में दाखिल हुए है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव आ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि निजी स्कूलों की अपेक्षा राज्य के सरकारी स्कूलों में अब अध्यापकों को अधिक वेतन दिया जाता है। 

कार्यक्रम में चौ. मित्रसेन की धर्मपत्नी श्रीमती परमेश्वरी देवी, सहकारिता मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर, पीजीआईएमएस रोहतक के कुलपति डॉ.ओपी कालरा, एशियन स्वर्ण पदक विजेता अमित पंघाल, स्कूल की चेयरपर्सन श्रीमती एकता सिंधु, मेजर सतपाल, भाजपा के जिला महामंत्री धर्मबीर शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी सुनीता रूहिल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी परमेश्वरी हुड्डा व स्कूल की प्राचार्य सुषमा झा आदि उपस्थित थे। 


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