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नया हरियाणा

शनिवार, 15 दिसंबर 2018

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हरियाणा के गांव में हर रोज फैल रहा है कैंसर

देश में कैंसर की वजह से हर साल 7 से 8  लाख लोगों की मौत हो जाती है.

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23 नवंबर 2018

नया हरियाणा

देश में कैंसर की वजह से हर साल 7 से 8  लाख लोगों की मौत हो जाती है. एक गांव ऐसा भी है जहां हर घर में बुखार नहीं बल्कि कैंसर होता है.  ये गांव है हरियाणा के सोनीपत  का सबोली नाथूपुर गांव, जहां पीने का पानी सबोली गांव के लिए जहर उगलता है. जिसकी चपेट में आकर  हर साल 10 से 12 लोगों की मौत कैंसर से हो जाती है. 
  कैंसर- यह शब्द सुनते ही सभी लोगों की रग-रग थर्राने लगती है.  वही एक गांव ऐसा भी है जहां हर घर में कोई न कोई कैंसर का मरीज है.  हरियाणा के सबोली नाथूपुर में हर साल कैंसर की मार झेलने को मजबूर हैं लोग. सबोली गांव में फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल लोगों की जान ले रहा है.  खेतों में लगे ट्यूबेल कैसा पानी दे रहे हैं, पानी का रंग तक बदल गया है. यह पानी पीने योग्य नहीं है और ना ही फ़सलों में देने लायक है. क्यूँकि पानी में बदबू इतनी आती है कि इसके पास खड़ा होना भी मुश्किल है. क्यूँकि पास में केमिकल की फेक्टरी है. जिसका ख़राब पानी सीधा ज़मीन में डाल रहे हैं. 
 सबोलीनाथू पुर गांव जहां पर कई फैक्ट्रियों ने गांव के लोगों को गांव से पलायन करने को मजबूर कर दिया है. जहर उगलती ये फैक्ट्रियां धड़ल्ले से चल रही हैं. इन फैक्ट्रियों की  वजह से गांव में कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी पनप रही है. ग्रामीण इसकी लगातार चपेट में आ रहे हैं और इन फैक्ट्रियों की वजह से कैंसर की खतरनाक बीमारी से अब तक कई ग्रामीणों की मौत हो चुकी है लेकिन इन जहरीली फैक्ट्रियों पर कार्रवाई के नाम पर ना सरकार कुछ कर रही है और ना ही प्रशासन. ग्रामीणों ने हर जगह गुहार लगाई है. साबोली की हवा में भी जहर घुला हुआ है जो लोगो को मारने में अपनी एक अलग भूमिका निभा रहा है.  यहां स्थापित अधिकतर फैक्ट्रियों की चिमनियां ऊंचाई पर नहीं है। इसके अलावा फ़ैक्टरियों से  निकलता  केमिकल जिसका असर भूजल पर भी आ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि केमिकल के निस्तराण के लिए फैक्ट्री संचालक जमीन में छेद कर बोरवेल के जरिए जहरीला केमिकल जमीन में छोड़ रहे हैं ,जिससे पानी खराब हो रहा है.
 कहते है जीने के लिए दो चीज़ें बहुत ज़रूरी होती है पीने के लिए पानी ओर साँस लेने के लिए शुद्ध हवा, लेकिन गाँव साबोली के लोगों के लिए ये दोनो चीज़ें कोसो दूर है. मंजू साबोली नाथुपुर की रहने वाली है मंजू के पति को केन्सर हुआ था और कुछ दिन पहले चल बसे. मंजू के पति दिल्ली MCD में नौकरी करते थे, कुछ समय पहले उनको कैन्सर हुआ. जब कैंसर का पता चल तब तक बहुत देर हो चुकी थी और वो चल बसे. मंजू की माने तो उनके गाँव में पानी बिल्कुल भी पीने लायक नहीं है और शाम को फैक्ट्रियों से निकलता हुआ धुआँ साँस लेने नहीं देता. 
 वही साबोली नाथूपुर में काफ़ी लोग कैंसर की बीमारी से पीड़ित है और काफ़ी लोग अपनी जान गाँव चुके हैं. अब देखना ये होगा की क्या सरकार इन जानलेवा फैक्ट्रियो पर कोई एक्सन लेती है या यहाँ के लोग यूं ही मरते रहेंगे.


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