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नया हरियाणा

मंगलवार, 23 अप्रैल 2019

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पूर्व सीएम हुड्डा ने 22 करोड़ का प्लॉट कांग्रेसी संस्था को 59 लाख में दे दिया

यंग इंडिया कंपनी में सोनिया और राहुल गांधी की 76 फीसदी हिस्सेदारी है.

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16 नवंबर 2018



नया हरियाणा

क्या है नेशनल हेराल्ड मामला? 
नेशनल हेराल्ड अखबार की शुरुआत 1938 में लखनऊ में हुई थी. जवाहर लाल नेहरू इसके पहले संपादक बने थे. 1942 में अंग्रेजी सरकार ने इसे बंद करवा दिया. लेकिन 1946 में इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी ने अखबार की कमान अपने हाथ में ली. 1977 में कांग्रेस की करारी हार के बाद अखबार को दोबारा बंद करना पड़ा था. लेकिन राजीव गांधी ने इसे दोबारा शुरू करवाया. हालांकि इस बार अखबार के लखनऊ संस्करण पर ताला लगा दिया गया और अखबार सिर्फ दिल्ली से छपने लगा.

लेकिन 2008 तक दिल्ली एडिशन को भी बंद करने की नौबत आ गई. अखबार का मालिकाना हक एसोसिएट जर्नल्स को दे दिया गया. आरोप है कि कांग्रेस ने इस कंपनी को 90 करोड़ का ब्याज मुक्त लोन दिया. इसके बावजूद अखबार को दोबारा चालू नहीं किया गया. साल 2012 में अखबार का मालिकाना हक यंग इंडिया कंपनी को ट्रांसफर किया गया. कंपनी में सोनिया और राहुल गांधी की 76 फीसदी हिस्सेदारी है. सुब्रमण्यम स्वामी का दावा है कि यंग इंडिया ने नेशनल हेराल्ड की 1600 करोड़ की संपत्ति को महज 50 लाख में हासिल की. घोटाले का आरोप लगाते हुए स्वामी मामले को 2012 में कोर्ट ले गए.

22 करोड़ का प्लॉट 59 लाख में दे दिया

नेशनल हेराल्ड कांग्रेसी अखबार है. नवजीवन नाम से इसकी वेबसाइट भी है.

इन्हें एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड(एजेएल AJL) नामक संस्था चलाती है.

1982 में भजनलाल की सरकार ने पंचकूला में एक प्लॉट इस संस्था को दिया. नियामानुसार इस संस्था को 6 महीने में निर्माण करना था. जो इसने नहीं किया. 
30 नवंबर 1992 को संपदा अधिकारी ने जमीन वापिस ले ली. 
10 नवंबर 1995 को 10% प्रतिशत कटौती के साथ रकम वापिस कर दी गई.

2004 में हुड्डा सरकार आई. अब कांग्रेस परिवार के प्रति वफादारी दिखाने और कुर्सी बचाने के लिए हुड्डा साहब ने 14 मई 2005 को अफसरों को कहा कि कोई तो रास्ता होगा प्लॉट देने का.
पंचकूला सेक्टर-6 में यह प्लॉट है. 3360 वर्ग मीटर का प्लॉट है.

अफसरों ने कहा कि कोई रास्ता नहीं है. अफसरों ने बाकयदा नोटिंग की थी कि पुराने रेटों पर जमीन देना संभव नहीं है.

हुड्डा साहब तो सत्ता के नशे में चूर और परिवार की अंधभक्ति में लीन थे. 28 अगस्त 2005 को पंचकूला की जमीन 1982 के रेटों(दर) पर एजेएल को दे दी गई.

अब यहां तक न तो सारे कांड इनेलो ने करवाए और न ही भाजपा ने(वो तो तब थी भी नहीं)

हरियाणा विजिलेंस विभाग ने 2016 में भूपेंद्र हुड्डा पर केस दर्ज किया.

सीबीआई ने जांच के बाद राज्य सरकार से मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी थी. अप्रैल 2016 में सीबीआई ने केस दर्ज किया और अब उसे विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल करनी है. जिसके लिए सरकार से मंजूरी मांगी गई है.

सरकार से मंजूरी की क्या जरूरत थी

लोक सभा में बदले गए नियमों के अनुसार पूर्व सीएम के खिलाफ जार्चशीट दाखिल करने से पहले राज्यपाल की मंजूरी अनिवार्य है.

हरियाणा के राज्पाल सत्यदेव नारायण ने इस मामले में मंजूरी दे दी है.

अब सीबीआई पूर्व सीएम हुड्डा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर सकेगी.

कोर्ट क्या सजा देती है, ये देखने वाली बात है. पॉवर का दुरुपयोग तो साफ किया ही गया है.


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