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नया हरियाणा

शनिवार, 15 दिसंबर 2018

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नेशनल हेराल्ड केस में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें बढ़ी

हरियाणा के राज्यपाल ने इस मामले में सिफारिश सीबीआई को भेजी है.

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15 नवंबर 2018

नया हरियाणा

नेशनल हेराल्ड की सहयोगी कम्पनी एजेएल को प्लॉट अलॉट मामले में राज्यपाल ने आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की. हरियाणा के राज्यपाल ने इस मामले में सिफारिश सीबीआई को भेजी है.

क्या था पूरा मामला

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सी.बी.आई.) ने 2016 में उनके खिलाफ नैशनल हेराल्ड समाचार पत्र के लिए पंचकूला में जमीन फिर से अलाट करने के लिए मामला दर्ज किया था। इस मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य प्रमुख कांग्रेसी नेता शामिल हैं।

एजेएल को पंचकुला सेक्टर 6 में 3,360 वर्म मीटर का प्लॉट आवंटित किया गया और आवंटन में गड़बड़ियां सामने आईं थी. हुड्डा की कांग्रेस सरकार के 2005 में सत्ता में आने के 6 महीने बाद ही इस घोटाले का खुलासा हो गया था. एजेएल नेशनल हेराल्ड न्यूजपेपर का पब्लिशर था.

पुराने रेट पर किया गया आवंटन
एफआईआर में कहा गया है कि 18 अगस्त 2005 को हूडा के चीफ ने प्लॉट का आवंटन करने के लिए अपने पद का गलत इस्तेमाल किया और नियमों का उल्लंघन किया. आरोप है कि एजेएल को प्लॉट उस कीमत पर आवंटित किया गया, जो 1982 में तय की गई थी. दरअसल एजेएल को ये प्लॉट 1982 में ही आवंटित किया गया था लेकिन कंपनी ने इसका इस्तेमाल नहीं कर पाई और 1996 में इस पर क्लेम किया.

स्वामी चाहते थे कि इस केस से जुड़े दस्तावेजों को अदालत में पेश करने की इजाजत दी जाए. उन्होंने मांग की थी कि मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और तीन आईएएस अफसरों संदीप सिंह ढिल्लन, विनीत गर्ग और शकुंतला जाखू के बयान दर्ज हों और उन्हें आरोपी बनाया जाए. 

क्या है नेशनल हेराल्ड मामला? 
नेशनल हेराल्ड अखबार की शुरुआत 1938 में लखनऊ में हुई थी. जवाहर लाल नेहरू इसके पहले संपादक बने थे. 1942 में अंग्रेजी सरकार ने इसे बंद करवा दिया. लेकिन 1946 में इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी ने अखबार की कमान अपने हाथ में ली. 1977 में कांग्रेस की करारी हार के बाद अखबार को दोबारा बंद करना पड़ा था. लेकिन राजीव गांधी ने इसे दोबारा शुरू करवाया. हालांकि इस बार अखबार के लखनऊ संस्करण पर ताला लगा दिया गया और अखबार सिर्फ दिल्ली से छपने लगा.

लेकिन 2008 तक दिल्ली एडिशन को भी बंद करने की नौबत आ गई. अखबार का मालिकाना हक एसोसिएट जर्नल्स को दे दिया गया. आरोप है कि कांग्रेस ने इस कंपनी को 90 करोड़ का ब्याज मुक्त लोन दिया. इसके बावजूद अखबार को दोबारा चालू नहीं किया गया. साल 2012 में अखबार का मालिकाना हक यंग इंडिया कंपनी को ट्रांसफर किया गया. कंपनी में सोनिया और राहुल गांधी की 76 फीसदी हिस्सेदारी है. सुब्रमण्यम स्वामी का दावा है कि यंग इंडिया ने नेशनल हेराल्ड की 1600 करोड़ की संपत्ति को महज 50 लाख में हासिल की. घोटाले का आरोप लगाते हुए स्वामी मामले को 2012 में कोर्ट ले गए.


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