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नया हरियाणा

मंगलवार, 21 मई 2019

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पूर्व सीएम बंसीलाल की कोठी को लेकर परिवार में संघर्ष

अदालत के फैसले के खिलाफ श्रुति चौधरी ने सेशन कोर्ट में अपील करने की बात कही है.

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6 नवंबर 2018



नया हरियाणा

पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल की संपत्ति के विवाद को लेकर सीनियर डिविजन सिविल जज आशुतोष के फैसले के बाद विजय नगर स्थित कोठी पर रविवार को कोई विशेष हलचल दिखाई नहीं दी। कोठी पर पहले की तरह किरण चौधरी के कुछ समर्थक जरूर बैठे दिखाई दिए, जो कि पहले भी अधिकांश समय दिखाई देते रहे हैं। हालांकि पूर्व मंत्री किरण चौधरी व उनकी बेटी श्रुति चौधरी कोठी पर मौजूद नहीं थीं। अदालत का फैसला अभी किसी भी पार्टी के पास नहीं पहुंचने की वजह से भी अभी स्थिति साफ नहीं है और इस वजह से भी कोई किसी प्रकार की हलचल नहीं हुई। उधर पूर्व मंत्री किरण चौधरी व पूर्व सांसद श्रुति चौधरी इस मामले को लेकर ऊपरी अदालत में अपील दायर करने की तैयारी में जुटी हुई हैं। सोमवार या फिर दीपावली के बाद मजबूती से कोर्ट में अपील दायर की जाएगी।

जानिए क्या है पूरा कोठी का विवाद

यहां सिविल जज जूनियर डिविजन आशुतोष की अदालत ने शनिवार को यह फैसला सुनाया है. अदालत में दायर याचिका में चौधरी बंसीलाल की पौत्री श्रुति चौधरी ने कहा था कि 6 जून 2004 को उसके पिता सुरेंद्र सिंह व दादा चौधरी बंसीलाल ने संयुक्त रूप से एक वसीयत उसके हक में की थी. जिसमें उसे कोठी समेत अन्य सम्पत्ति का उत्तराधिकारी बताया गया था. यह विल ही असली है. 

वहीं दूसरी तरफ रणबीर सिंह महेंद्रा ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि 19 जुलाई 2005 में चौधरी बंसीलाल ने चण्डीगढ़ के सब रजिस्ट्रार कार्यालय में एक विल रजिस्टर्ड कराई थी. जिसमें कहा गया कि उनकी सम्पत्ति की हकदार उनकी पत्नी विधा देवी हैं. चौधरी बंसीलाल की मृत्यु के उपरांत विधा देवी ने चौधरी बंसीलाल की सम्पत्ति व अपनी स्वयं की सम्पत्ति को मिलाकर चौधरी बंसीलाल मैमोरियल ट्रस्ट का गठन किया. 

विधा देवी स्वयं उसकी प्रधान बनी और पारिवारीक सदस्यों को भी शामिल किया. इस विल को श्रुति चौधरी ने अदालत में चुनौती दी थी और बंसीलाल की सम्पत्ति पर अपना हक जमाया था. जिस पर अदालत में लंबी सुनवाई हुई. दोनों पक्षों की तरफ से अदालत में कई गवाहो से गवाही भी कराई गई. 

रणबीर सिंह महेंद्रा की तरफ से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अविनाश सरदाना ने बताया कि शनिवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए यहां सिविल जज जूनियर डिविजन आशुतोष की अदालत ने श्रुति चौधरी द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया. 

वहीं रणबीर सिंह महेंद्रा द्वारा प्रस्तुत की गई विल को असली करार दिया. अदालत ने कहा कि श्रुति चौधरी द्वारा प्रस्तुत की गई विल रजिस्टर्ड नहीं है. जबकि दूसरे पक्ष ने रजिस्टर्ड विल प्रस्तुत की. इसलिए यह प्रोपर्टी चौधरी बंसीलाल मैमोरियल ट्रस्ट की ही रहेगी.

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल की संपत्ति को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद में करीब 12 साल बाद सिविल जज सीनियर डिवीजन आशुतोष की अदालत ने अहम् फैसला सुना दिया है. अदालत ने बंसीलाल की पौत्री श्रुति चौधरी की वसीयतनामे को नकारते हुए संपत्ति को उनके नाम से बनाए गए चौ. बंसीलाल मेमोरियल ट्रस्ट को सौंपने का फैसला सुनाया है. अदालत के फैसले के खिलाफ श्रुति चौधरी ने सेशन कोर्ट में अपील करने की बात कही है.


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