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नया हरियाणा

बुधवार, 21 नवंबर 2018

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कालीरामना खाप ने उदारता की मिसाल पेश की है : कैप्टन अभिमन्यु

उन्होंने कहा कि मैं दीन बन्धु छोटूराम के दिखाए मार्ग पर चल रहा हूँ।

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3 नवंबर 2018

नया हरियाणा


हिसार जिले के सिसाय गांव में आज अखिल भारतीय कालीरामना खाप के 5वें स्थापना समारोह की अध्यक्षता हरियाणा सरकार के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने क़ी।

उन्होंने कालीरामना खाप के योगदान पर विचार रखते हुए कहा कि कालीरामना खाप को विश्व भर में पहचान दिलाने वाले पहलवान चन्दगीराम का विशेष योगदान रहा है। विश्व ख्याति प्राप्त पहलवान चन्दगीराम के लड़के और लड़कियों ने भी कालीरामना खाप को नई ऊंचाइयां दी हैं।

उन्होंने कहा कि भाई जगदीश,  हमारी बहन सोनिका जो कि अमेरिका में हैं वो हमारे समाज का नाम ऊँचा कर रही हैं। हमारे गाँव सिसाय की बेटी अपनी मेहनत और लगन से hcs बनी। जब हमारी सरकार ने ईमानदारी सेनौकरी देने का फैसला किया। 2014-15 में जब हमारी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया शुरू की तो इसी गांव की बहन-बेटी ने परीक्षा पास की, उनका चयन हुआ।

उन्होंने बताया कि आधुनिक युग में अगर आपको बड़ा बनना है तो मन और मस्तिष्क को बड़ा करके चलना होगा। बेटे-बेटी को बेड़ियों में बांध के नहीं रखना चाहिए। उन्हें ऊँची उड़ान भरने देनी चाहिए। हमें  अपने खून पर भरोसा रखना चाहिए। वह अपने कुल का नाम ऊँचा ही करेंगे।  कालीरमण खाप ने अपनी उदारता दिखाते हुए बड़े मन वाला फैसला लिया। फैसला लेते हुए कालीरमण खाप ने खुद को केवल एक जाति तक सीमित नहीं रखा। बल्कि कहा कि जिसकी भी रगों में कालीरमण का खून है वो किसी भी जात-बिरादरी में काम करता हो वो कालीरमण खाप का सदस्य माना जाएगा।

 मैं समाजशास्त्र का एक छोटा-सा स्टूडेंट रहा हूँ. आपकी इस बात से मैं बहुत प्रभावित हुआ। गाँव को 36 बिरादरी का गुलदस्ता होना चाहिए। किसी भी गाँव में ये न हो तो उन्हें ढूंढ-ढूंढ कर लाया करते, उन्हें जमीन दिया करते उन्हें बसाया करते। बणिया, अग्रवाल बिरादरी के व्यापार करने वाले भाई जो गाँव छोड़ के चले जाया करते तो गाँव के लोग इकट्ठा होकर उनके पास जाया करते और कहते कि एक भाई तो घर में छोड़ दो, हमारा गाँव 36 बिरादरी का रहना चाहिए। यही हमारे समाज की खूबसूरती है।

उन्होंने वर्तमान दौर में भटकते युवाओं पर अपने विचार रखते हुए कहा कि नौजवान आज गलत दिशा में जा रहें है। लगता है हमारे बुजुर्ग हुक्के भरण छोड़ गए हैं। अफसोस की बात है कि हमारे नौजवान जब जेल से छूट कर आया करते हैं तो उन्हें लेने के लिए 100-200 बाइक लेकर जाया जाता है। ये किस तरह की सोच हम अपनी नौजवान पीढ़ी को दे रहें हैं। ये तो उस नौजवान को हीरो बनाने का काम कर रहे हैं जो कि गलत है। भला कौन दादा-दादी अपने पोते- बच्चे को जेल में डालकर हीरो बनाना चाहता है। थोड़े में गुजारा करना जेल जाने से बेहतर है। 

मेरे जीवन का लक्ष्य है कि दीनबंधु सर छोटूराम जी के दिखाए मार्ग पर चल सकूं। उन्होंने कहा था कि मेरे गाँव का किसान मेंरे 2 बेटे मेरे 2 बैलों की जोड़ी की तरह हो। मेरा एक बेटा खेत में काम करे, अनाज पैदा करे, सबका पेट भरने का काम करेे और दूसरा फ़ौज में भर्ती होकर देश की सेवा करे।

 सर छोटूराम बहुत दूरदृष्टि के आदमी रहे हैं। वो बहुत पढ़े-लिखे आदमी थे। 1908 में उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरी की। उसके बाद आगरा में उन्होंने नौकरी की। 1911 में उन्होंने वकालत की। उन्होंने समाज को समझकर  और उसे दिशा देने का काम  किया। ये जो पगड़ी आज हमारे सिर पर है और हम  जो जमीन के मालिक कहलाते हैं वो कभी किसी जमाने में सर छोटूराम के कानून बनाने से पहले हम उसी जमीन पर मजदूर का काम किया करते थे।
ये जमीन पर मालिकाना हक, इस पर बोने का हक, अन्न पैदा करके खाने-कमाने का हक, सर पर पगड़ी पहनने का हक, जमीदार कहलाने का हक अगर किसी ने हमें दिया है तो वो सर छोटूराम जी ने दिया है। उनकी सोच थी कि अगर दोनों बेटे खेती करेंगे तो अगर आज 20 किल्ले हैं तो भविष्य में  वो दोनों बेटे में 10-10 हो जाएंगे। अगर 10 किल्ले हैं तो भविष्य में 5-5 हो जाएंगे। इस तरह के  हालात आज बन रहे हैं। लेकिन अगर एक बेटा खेती करे तो दूसरा फ़ौज में भेज दिया। जिन परिवारों ने ऐसा किया आज  उन परिवारों ने 10 किल्ले को 20 कर लिया। केवल खेती करने से काम नहीं चलेगा।
आर्थिक उन्नति का मार्ग पूरी दुनिया में है तो वो खेती से नहीं बल्कि उद्योग और कारखाने से भी अब आगे बढ़ गया।  हम जिसे सेवा क्षेत्र कहते है, सर्विस सेक्टर कहते हैं , नया इकोनॉमिक पावर उसमें है। अर्थव्यवस्था की ताकत उसमें है। जो कम्प्यूटर की अवधारणा है। हरियाणा प्रांत में मैं वित्त मंत्री होने के नाते आपका सेवक हूँ। आपका नुमाइंदा हूँ आपने मुझे प्रतिनिधि बनाया वो सब आपके कारण बना है। मैंने सबको समझने की कोशिश की, पढाई की, सर छोटूराम को पढा, चौधरी चरणसिंह को भी पढ़ा और जाना अगर हरियाणा के जो ढाई करोड़ लोग 100 रुपये पैदा करते हैं तो उस 100 रुपये में से मात्र 15 रुपये खेती-किसानी से पैदा रुपये है। जो ढाई करोड़ लोग  जो फैक्टरी, उद्योग लगा करके , कारखाने लगा करके मजदूरी करके, कोई होटल, रेस्टोरेंट, ट्रांसपोर्ट चला करके , व्यापार करते है तो उस 100 रुपये में से खेती- किसानी का पैसा मात्र 15 रुपये है। बाकी बचा 85 रुपये कारखाने,व्यापार में से है। 
मतलब 60 प्रतिशत लोग अगर 15 रुपये पर निर्भर है तो  40 प्रतिशत लोग लगभग 85 रुपये के हकदार है।
अब इसे ऐसे समझे कि अगर 100 लोगों में से 60 लोग 15 रुपये में हिस्सेदारी करे तो सबके हिस्से में 25 पैसे आएंगे यानी चवन्नी और 40 लोगों को 80 रुपये के हिसाब से 2-2 रुपये हाथ आएंगे। यानी एक आदमी को 2 रुपये और किसान के हाथ आई केवल चवन्नी। हिस्सा किसमें करना चाहिए? चवन्नी में या 2 रुपये।  अब मेरा काम है इन चवन्नी में बैठे लोगों को 2 रुपया में लेकर आऊंगा। इन्हें आठ गुना करने का काम हमारा है।

इस नीति पर ईमानदार नियत के साथ पूरी प्रतिबद्धता के साथ हमें निरन्तर आगे बढ़ना है।

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