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नया हरियाणा

शुक्रवार, 24 मई 2019

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प्राइवेट स्कूलों पर सख्ती से सरकार को होगा सौ करोड़ का फायदा

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ लिया हरियाणा सरकार ने बड़ा फैसला.

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27 अक्टूबर 2018



नया हरियाणा

हरियाणा में सालों से स्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर सरकार ने नकेल कसनी शुरू कर दी है। स्कूल शिक्षा विभाग में सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों से ब्यौरा उपलब्ध कराने को कहा है। फॉर्म नंबर-2 भरकर स्कूलों को भवन सहित मौजूद सभी सुविधाओं की जानकारी मुहैया करानी होगी। सरकार के द्वारा मांगने से निजी स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है। सरकार ने यू-टर्न न मारा तो लगभग 100 करोड़ रुपए का राजस्व आएगा। चूंकि प्रदेश के बहुत से निजी स्कूल आज भी दुकानें चला रहे हैं। अनेक निजी स्कूल आज भी एक दो कमरों में चल रहे हैं। ढांचागत सुविधाएं लगभग न के बराबर है। यह सरकार से एनओसी लेकर आज तक बचते रहे।  स्कूल शिक्षा विभाग के पास प्रदेश में कितने मान्यता प्राप्त स्कूल हैं, इसका भी पूरा रिकॉर्ड नहीं है। पहले जिला स्तर पर ही मान्यता दे दी जाती थी, फिर शिक्षा निदेशालय पर दी जाने लगी। आज तक विभाग ने इसका रिकॉर्ड ही संकलित नहीं किया। अब सरकार ने सभी निजी स्कूलों को फॉर्म नंबर-2 भरकर पूरी जानकारी मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। जिसका स्कूल कड़ा विरोध कर रहे हैं। वहीं अभिभावकों और स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन ने सरकार की इस कार्रवाई का स्वागत किया है।

हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू, संरक्षक तेलूराम व उपप्रधान संजय धतरवाल ने कहा कि शिक्षा विभाग में प्राइवेट स्कूलों को दोबारा फॉर्म नंबर-2 भरने संबंधी आदेश वापस न लिया तो बड़ा आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर 10 वर्ष पहले स्थायी मान्यता ले चुके स्कूलों को दोबारा से निर्धारित फीस सहित फॉर्म नंबर-2 भरने के आदेश दिए हैं। यह प्राइवेट स्कूलों को तंग करने की योजना है। फॉर्म नंबर-2 भरने से दोबारा जिला स्तरीय कमेटी स्कूलों का निरीक्षण करेगी। शर्तें पूरी करने वाले स्कूल को स्थायी मान्यता दे दी जाएगी। अनेक स्कूल ऐसे भी हैं जो सरकार के वर्तमान नियम व शर्तों को पूरा नहीं करते। अगर उनकी मान्यता रद्द करने की सोची गई तो संचालक सड़कों पर उतरेंगे।

प्राइवेट स्कूल संघ का प्रतिनिधिमंडल शिक्षा सदन पंचकूला में संयुक्त निदेशक राजीव प्रसाद से मिला। प्रसाद ने कहा कि अब फॉर्म भरवा कर विभाग देखना चाहता है कि स्थायी मान्यता प्राप्त कितने स्कूल चल रहे हैं और कितने नहीं। इस पर सत्यवान कुंडू ने कहा कि शिक्षा बोर्ड हर वर्ष स्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों से निरंतरता फीस के रूप में दो हजार रुपये भरवाता है। इससे पता चल जाता है कि स्कूल चल रहे हैं या नहीं। दोबारा फॉर्म भरवाने की बजाए शपथ पत्र लेकर भी स्कूलों की स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। संयुक्त निदेशक ने आश्वासन दिया कि इस प्रक्रिया को सरल किया जाएगा।


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