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नया हरियाणा

सोमवार , 27 मई 2019

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CBSE ने दी निजी स्कूलों को चेतावनी, अब नहीं चलेगी मैनेजमेंट की मनमानी

निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक लंबे अर्से से परेशान चल रहे थे.

CBSE, Delhi, warns private schools, no longer will the managements arbitrary, naya haryana, नया हरियाणा

26 अक्टूबर 2018



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सीबीएसई की सिलेबस गाइड लाइन
सीबीएसई द्वारा संशोधित शिक्षा नियमावली में यह स्पष्ट किया गया है कि चैप्टर 2 के नियम 2,4,6 के तहत एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम को ही सीबीएसई बोर्ड के निजी स्कूलों को पढ़ाना होगा। इस पाठ्यक्रम से अलग किसी भी प्रकाशक की पुस्तकें निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। आमतौर पर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें जो काफी महंगी होती हैं, उन्हें बच्चों पर थोप दिया जाता है जिसमें कमीशन खोरी का भी मोटा घालमेल होता है। निजी स्कूलों की मनमानी से हर साल अभिभावकों की जेब पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ ही उन्हें करोड़ों का चूना लग जाता है। जबकि एनसीईआरटी की पुस्तकें काफी सस्ते में उपलब्ध हो जाती हैं।
सीबीएसई बोर्ड ने निजी स्कूलों को मान्यता देने के नियम भी खड़े कर दिए हैं। सीबीएसई के चैप्टर 11 के नियम 11.7.12 के तहत इन नियमों में निजी स्कूलों को किसी तरह की कोई छूट की गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है। वहीं सभी नियमों पर खरा उतरने के बाद ही मान्यता और संबद्धता पर बोर्ड द्वारा विचार किया जाएगा। इतना ही नहीं, पुराने मान्यता वाले निजी स्कूलों के लिए भी यह नियम कड़े कर दिए गए हैं। पुराने और नई मान्यता वाले निजी स्कूलों की निरीक्षण कमेटी द्वारा वीडियोग्राफी कराई जाएगी। जिसमें क्लासरूम, लेबोरेट्री,प्ले ग्राउंड, बाउंड्री वॉल सहित अन्य हिस्सों की भी वीडियोग्राफी कराई जाएगी। जिसे मान्यता देते समय दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
मैनेजमेंट की मनमानी
सीबीएसई ने न केवल पाठ्यक्रम को लेकर ही निजी स्कूलों पर लगाम कसी है, बल्कि निजी स्कूलों की प्रबंध कारिणी (स्कूल मैनेजमेंट) पर भी नियमों का कड़ा पहरा बैठा दिया है। सीबीएसई द्वारा संशोधित नियमावली के चैप्टर 6 के अंतर्गत नियम 6,2 में यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों से वसूली जाने वाली फीस की राशि को किसी सोसायटी, ट्रस्ट, कम्पनी व मैनेजमेंट कमेटी के द्वारा अपने निजी हितों को साधने के लिए कतई इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं स्कूल के फंड को सही तरीके से उपयोग में लाया जाएगा। जिसकी पारदर्शिता कार्यप्रणाली भी सीबीएसई की निगरानी में रहेगी। इन नियमों का उल्लंघन करने पर भी मान्यता पर संकट के साथ-साथ 5 लाख तक का जुर्माना ठोके जाने की व्यवस्था की गई है। स्कूल के अंदर सभी प्रकार के फलों को पारदर्शिता के तहत इस्तेमाल करना होगा।
इस संबंध में स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने बताया कि सीबीएसई बोर्ड से जुड़े निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए संगठन द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में भी कई बार याचिका लगाई गई, जिसके अंतर्गत निजी स्कूलों पर लगाम लगाने के लिए आखिरकार सीबीएसई बोर्ड द्वारा पुरानी शिक्षा नियमावली में व्यापक स्तर पर संशोधन कर 18 अक्टूबर 2018 को संशोधित नियमावली 2018 जारी कर दी गई है। इस नियमावली में निजी स्कूलों की मनमानी पर काफी हद तक अंकुश लगेगा वहीं लाखों बच्चों के हितों के साथ स्कूल प्रबंधन मनमानी कर खिलवाड़ नहीं कर पाएगा। इसके साथ ही निजी स्कूलों द्वारा फीस बढ़ोतरी एवं पाठ्यक्रम की पुस्तकों को लागू कराए जाने के मामले में दिसंबर माह में माननीय उच्च न्यायालय में सुनवाई भी निर्धारित की हुई है।


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