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नया हरियाणा

मंगलवार, 23 जनवरी 2018

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यशपाल मलिक और सैनी के विरोध में आया आर्य समाज

गौरतलब है कि यशपाल गुट पिछले कुछ महीनों से लगातार अपनी साख खोता जा रहा है और समिति के पदाधिकारियों की भाषा राजकुमार सैनी की भाषा जैसी होती जा रही है. दोनों ही समाज को तोड़ने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं, जबकि सरकार दोनों पर मौन बनी हुई है.


Arya Samaj came in protest against Yashpal Malik and Saini, naya haryana

8 दिसंबर 2017

नया हरियाणा

हरियाणा समाज का जागरूक तबका निरंतर इस प्रयास में रहता है कि हरियाणा के भाईचारे में दोबारा किसी तरह की आँच न आए। इसके लिए हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तरीके से भाईचारे को तोड़ने वाली शक्तियों का विरोध लगातार किया जा रहा है तथा समाज में भाईचारा बना रहे इसके लिए लगातार सकारात्मक संदेश दिए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में आर्य समाज की तरफ से शुरूआत की गई है। इससे पहले रोहतक से भी इस तरह के सकारात्मक पहल शुरू हो चुकी है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी अनेक जागरूक नागरिक इस भूमिका को निभा रहे हैं, जिनमें नारायण सिंह तेहलान, संगीता दहिया, किरण मलिक, जसवंत सिंह आदि प्रमुख नाम हैं।
आर्य समाज ने सांसद राजकुमार सैनी और अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक पर प्रदेश में भाईचारे के माहौल को खराब करने का आरोप लगाया है और प्रदेश को जातिवाद की आग में झोंकने का आरोप लगाया है। आर्य समाज ने प्रदेश में भाईचारा फिर से बनाने के लिए गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने का फैसला लिया है। इसकी शुरुआत 17 दिसंबर को पानीपत से की जाएगी। 
इसको लेकर आर्य समाज के वैदिक प्रचारक एवं आर्य बाल भारती स्कूल के निदेशक आचार्य अभय आर्य वीरवार को मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र सांसद राजकुमार सैनी और अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए प्रदेश में भाईचारे का माहौल बिगाड़ दिया है। आज प्रदेश में भाईचारा खत्म होता नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि सर छोटूराम आर्य समाजी थे और जातिवाद के घोर विरोधी थे। उन्होंने ताउम्र देश के कमेरे (मजदूर वर्ग) वर्ग के हितों की लिए संघर्ष किया। पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह ने भी ताउम्र कमेरे वर्ग के हित के लिए संघर्ष करने के साथ दलित और पिछड़े वर्ग को राजनीतिक रूप से सक्रिय किया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते जातियों के नाम पर बनाए गए स्कूलों की सरकारी मदद बंद कर दी थी। उन्होंने मलिक पर निसाना साथा कहा कि, वे प्रदेश के लोगों को आरक्षण के नाम पर बरगला रहे हैं, जबकि रामपाल के समर्थकों को सहारा दे रहे हैं। रामपाल के समर्थकों ने पिछले दिनों जसिया गांव में अपनी पुस्तक भी बांटी थी और रामपाल के समर्थन में नारे भी लगाए थे। कहा कि आर्य समाज आर्थिक आरक्षण का समर्थन करता है। राजकुमार सैनी भी अपने स्वार्थ के लिए प्रदेश का भाईचारा खराब करने में पीछे नहीं हैं। वे एक जाति विशेष के लोगों के खिलाफ लगातार अपनी बयानबाजी कर रहे हैं। 
इससे पूर्व जसिया में 26 नवंबर को हुई  जाट महारैली और कौशल विकास केंद्र के भूमि पूजन के कार्यक्रम को लेकर सर्वखाप पंचायत, सरपंच और जेल से आए युवाओं और सोशल मीडिया के जागरूक लेखकों की ओर से जाट नेता यशपाल मलिक का विरोध हुआ था। जिसके कारण जाट समाज का बड़ा हिस्सा इस रैली में शामिल नहीं हुआ था। इसकी भनक लगने के बाद यशपाल मलिक गुट ने अभय चौटाला और संत रामपाल के माध्यम से जसिया में भीड़ जुटाने का काम किया था। जिसके कारण इनेलो कार्यकर्ताओं में अभय चौटाला और पार्टी के प्रति रोष बढ़ गया है।
गौरतलब है कि यशपाल गुट पिछले कुछ महीनों से लगातार अपनी साख खोता जा रहा है और समिति के पदाधिकारियों की भाषा राजकुमार सैनी की भाषा जैसी होती जा रही है. दोनों ही समाज को तोड़ने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं, जबकि सरकार दोनों पर मौन बनी हुई है.
 


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