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नया हरियाणा

बुधवार, 21 नवंबर 2018

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पार्टी में अनुशासनहीनता पर आज देंगे दुष्यंत चौटाला जवाब

दुष्यंत व दिग्विजय पर ये आरोप भी लगे कि उन्होंने दूसरे राजनीतिक दलों के साथ मिलकर इनेलो को नुकसान पहुंचाया।

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25 अक्टूबर 2018

नया हरियाणा

हरियाणा के प्रमुख विपक्षी दल– इनेलो और चौटाला परिवार में चल रही कलह अब और बढ़ सकती है। पार्टी के भीतर की लड़ाई अब सावर्जनिक मंचों पर साफ दिखाई देने लगी है। जहां एक तरफ इनेलो का ग्राफ पिछले कुछ सालों में बढ़ता हुआ दिख रहा था, वहीं अब भीतर की लड़ाई ने कार्यकर्ताओं के हौंसले को दो फांक में बदल दिया है।

पूर्व सीएम एवं इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के निर्देशों पर हिसार के सांसद दुष्यंत चौटाला को दिए गए निलंबन नोटिस पर अब कार्यवाही का समय आ गया है। बृहस्पतिवार को दुष्यंत नोटिस का जवाब पार्टी की अनुशासन समिति को सौंपेंगे। लाडवा से पूर्व विधायक शेर सिंह बड़शामी समिति के चेयरमैन हैं।इनेलो से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी सुप्रीमो बृहस्पतिवार को मेडिकल जांच के लिए तिहाड़ से बाहर आ सकते हैं। हालांकि अधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है।


गोहाना में 7 अक्तूबर को हुई सम्मान दिवस रैली में विपक्ष के नेता अभय चौटाला के भाषण के दौरान हुई हूटिंग और दुष्यंत के समर्थन में लगे नारों के बाद पार्टी के कार्यालय सचिव नच्छत्र सिंह मल्हान की ओर से दुष्यंत को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सस्पेंड करने का नोटिस दिया गया था।एक सप्ताह में दुष्यंत को इस नोटिस का जवाब देना था।

इससे पहले ही दुष्यंत ने 14 अक्तूबर को नोटिस के जवाब में पत्र लिखकर पार्टी नेतृत्व से उन पर लगाए गए आरोपों को साबित करने के सबूत मांगे। यही नहीं, इसके बाद 17 अक्तूबर को दुष्यंत ने इस संदर्भ में रिमाइंडर भी भेजा, लेकिन इसका कोई जवाब नहीं आया है। तिहाड़ जेल जाने से पहले दुष्यंत व उनके छोटे भाई व इनसो अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला ने नई दिल्ली में इनेलो सुप्रीमो से मुलाकात भी की थी।


दुष्यंत की ओर से भेजे गए रिमाइंडर में पूछा गया कि उन्हें यह बताया जाए कि उन्होंने किस तरह से पार्टी के ढांचे को तोड़ा। दुष्यंत व दिग्विजय पर ये आरोप भी लगे कि उन्होंने दूसरे राजनीतिक दलों के साथ मिलकर इनेलो को नुकसान पहुंचाया। इसके सबूत भी दोनों भाइयों ने पार्टी से मांगे हैं। रोचक बात यह है कि अनुशासन समिति की ओर से अभी तक दुष्यंत से किसी तरह की पूछताछ नहीं की गई है।

ऐसे में यह सवाल आम चर्चा का विषय बना हुआ है कि दोनों भाई किस दल और किस नेता के साथ मिलकर इनेलो को तोड़ने का काम कर रहे थे। कुछ के कयास हैं कि इसके पीछे बीजेपी का हाथ है और कुछ का आरोप है कि कांग्रेस के नेताओं की चाल है. आखिर सच क्या है?


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