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नया हरियाणा

बुधवार, 21 नवंबर 2018

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रोडवेज कर्मचारी अपनी मांगों पर अडिग, सीएम ने कहा हर हाल में आकर रहेंगी 720 बसें

पड़ोसी राज्यों– हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और चंडीगढ़ से मांगी गयी मदद को कर्मचारी यूनियनें झटका दे सकती हैं।

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23 अक्टूबर 2018

नया हरियाणा

हरियाणा में पिछले 7 दिनों से चल रही रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के बीच मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कड़ा स्टैंड ले लिया है। सीएम ने दो-टूक कहा है कि रोडवेज बेड़े में किमी योजना के तहत 720 प्राइवेट बसें किराये पर लेने का फैसला जनता की सुविधा और हित के लिए लिया गया है। सरकार इस फैसले से पीछे नहीं हटेगी और ये बसें रोडवेज बेड़े में शामिल होकर रहेंगी।
सोमवार को सीएम ने कर्मचारियों का भी आह्वान किया कि वे अपनी जिद को छोड़ें और काम पर लौट आएं। इससे पूर्व सीएम की ही अपील पर रविवार को कर्मचारियों की तालमेल कमेटी के नेताओं की सरकार के अधिकारियों के साथ पांच घंटे की वार्ता हो चुकी है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस पूरे मुद्दे पर सीएम भी कर्मचारियों के साथ बैठक कर सकते हैं। अलबत्ता अपना फैसला वापस लेने को सरकार कतई तैयार नहीं है।
सख्त लहजे में सीएम ने कहा कि सरकार का काम जनता के हित में नीतियां बनाकर उन्हें लागू करना है। मौजूदा मामले में भी सरकार ने वही काम किया है। कर्मचारियों के ये आरोप और आशंका पूरी तरह से गलत है कि सरकार परिवहन विभाग का निजीकरण कर रही है। परिवहन बेड़े की मौजूदा क्षमता के हिसाब से लोगों को बेहतर परिवहन सेवाएं देना संभव नहीं है। इसीलिए किराये पर बसें हायर करने का फैसला लिया गया है। रोडवेज बड़े में 650 नई बसें शामिल करने की भी मंजूरी सरकार दे चुकी है। सीएम का कहना है कि किमी योजना के तहत जो बसें किराये पर ली जा रही हैं, वे 31 से 37 रुपये प्रति किमी की दर से मिलेंगी। इन बसों का पूरा कंट्रोल सरकार के पास रहेगा और इनके परिचालक भी सरकार द्वारा ही नियुक्त किए जाएंगे। सरकार का तर्क है कि वर्तमान में चल रही बसों का खर्चा अधिक पड़ रहा है। इस वजह से लोगों पर भी आर्थिक बोझ पड़ता है।

7 दिन में लगी 28 करोड़ की चपत 
रोडवेज कर्मचारियों की सात दिन से चल रही हड़ताल से विभाग को लगभग 28 करोड़ रुपये की चपत लगी है। अगर हड़ताल और भी लम्बी चलती है तो यह नुकसान और भी बढ़ेगा। वहीं इस वजह से आम लोगों को होने वाली परेशानी अलग है। इस लिहाज से रोजाना करीब 4 करोड़ रुपये का नुकसान विभाग को होता है। एक सप्ताह से चक्का जाम है, इसलिए नुकसान 28 करोड़ तक पहुंच चुका है।

हरियाणा सरकार के साथ वार्ता विफल होने के बाद रोडवेज कर्मचारियों की तालमेल कमेटी ने बसों की हड़ताल 3 दिन और बढ़ा दी है। अब प्रदेश में बसों के पहिये 25 अक्तूबर तक थमे रहेंगे। वहीं दूसरी ओर, सरकार ने सख्ती करते हुए सोमवार को 41 ड्राइवरों को बर्खास्त करने के आदेश जारी कर दिए। इनके अलावा नवनियुक्त 1628 ड्राइवरों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। इस बीच, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि रोडवेज बेड़े में किलोमीटर योजना के तहत 720 प्राइवेट बसें किराये पर लेने का फैसला जनता की सुविधा के लिए लिया गया है। सरकार इस फैसले से पीछे नहीं हटेगी और यह बसें रोडवेज बेड़े में शामिल होकर रहेंगी।
रविवार को सीएम के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर और ट्रांसपोर्ट विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव धनपत सिंह के साथ हुई वार्ता की समीक्षा के लिए तालमेल कमेटी के नेताओं ने ‘गुप्त’ बैठक की। इस बैठक में तालमेल कमेटी के नेताओं– इंद्र सिंह बधाना, ओमप्रकाश ग्रेवाल, अनूप सहरावत, दलबीर सिंह किरमारा, हरिनारायण शर्मा, जयभगवान कादियान, सरबत सिंह पूनिया, नसीब जाखड़, बलवान दोदवा, आजाद गिल और रामकुमार वर्मा मुख्य रूप से शामिल रहे।
बैठक के बाद तालमेल कमेटी के नेताओं ने चक्का जाम 25 अक्तूबर तक बढ़ाने का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा है कि जब तक सरकार किलोमीटर योजना के तहत प्राइवेट कंपनियों की बसें किराये पर लेने का फैसला वापस नहीं लेती, आंदोलन खत्म नहीं होगा। यही नहीं, तालमेल कमेटी ने आने वाले दिनों में अनिश्चितकालीन हड़ताल करने का भी मन बना लिया है। कर्मचारी नेताओं का दावा है कि पंजाब, चंडीगढ़ के रोडवेज कर्मचारी उनके साथ हैं।

नहीं आएंगे पड़ोसी राज्यों के ड्राइवर-कंडक्टर : लांबा 
पड़ोसी राज्यों– हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और चंडीगढ़ से मांगी गयी मदद को कर्मचारी यूनियनें झटका दे सकती हैं। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेश महासचिव सुभाष लांबा ने कहा कि भले ही उत्तर प्रदेश सरकार अपनी 300 बसें हरियाणा भेजने को तैयार हो गई है, लेकिन पड़ोसी राज्यों के कर्मचारी खुलकर हरियाणा के कर्मचारियों के समर्थन में हैं। वहां के चालक-परिचालक भी बसें लेकर हरियाणा नहीं आएंगे। लांबा ने कहा कि आल इंडिया ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के अध्यक्ष केके दिवाकरण से बात हो चुकी है। उन्होंने हरियाणा से सटे सभी राज्यों की ट्रांसपोर्ट यूनियनों को निर्देश जारी कर दिए हैं। लांबा के अनुसार, फेडरेशन ने हड़ताल का समर्थन करते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है। उन्होंने कहा कि सोमवार को हिमाचल के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किए। मंगलवार को चंडीगढ़ और पंजाब के रोडवेज कर्मचारी उनके समर्थन में प्रदर्शन करेंगे।
26 से सामूहिक अवकाश : सुभाष लांबा कहा कि सर्व कर्मचारी संघ ने फैसला किया है कि निजीकरण के खिलाफ जनमत तैयार किया जाएगा। इस कड़ी में 24 को सभी जिला मुख्यालयों पर सेमीनार होंगे। 25 को कर्मचारी मिलकर जिलों में प्रदर्शन करेंगे और सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसी दिन शाम 3 बजे से 24 घंटे का क्रमिक अनशन शुरू होगा। सरकार नहीं मानी तो 26 अक्तूबर से सभी विभागों के कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर जाएंगे।
टेंपररी परमिट जारी करने की तैयारी : यूपी सरकार द्वारा 300 बसें भेजने के फैसले के बाद राज्य सरकार ने टेंपररी परमिट जारी करने के निर्देश दे दिए हैं। बताते हैं कि यमुनानगर, पानीपत और करनाल में रोडवेज अधिकारियों ने टेंपररी परमिट जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यूपी ने हरियाणा में अपनी बसों के फेरे बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की बसों के फेरे भी हरियाणा में बढ़ेंगे।
चालकों-परिचालकों की भर्ती तेज
सरकार ने चालकों-परिचालकों की भर्ती तेज कर दी है। हालांकि, भर्ती के साथ युवाओं से शपथ-पत्र लिया जा रहा है कि उन्हें बिना किसी कारण और पूर्व नोटिस के कभी भी हटाया जा सकता है। इसके बावजूद अस्थाई तौर पर चालक-परिचालक लगने के लिए युवाओं की लाइनें लगी हुई हैं।


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