Hindi Online Test Privacy Policy | About Us | Contact

नया हरियाणा

रविवार, 22 सितंबर 2019

पहला पन्‍ना सर्वे लोकप्रिय 90 विधान सभा हरियाणा चुनाव राजनीति अपना हरियाणा देश शख्सियत वीडियो आपकी बात सोशल मीडिया मनोरंजन गपशप English

तीन साल पहले पड़ी थी मोदी और मनोहर के मंत्रियों की दोस्ती में दरार

केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने अपने मित्र विपुल गोयल की बजाए सीमा त्रिखा को बनवा दिया था सीपीएस

Union Minister KP Gurjar, Vipul Goyal, Dussehra combustion program, NIT Dussehra festival, naya haryana, नया हरियाणा

21 अक्टूबर 2018



नया हरियाणा

न्यू इंडस्ट्रियल टॉउन (एनआइटी) के दशहरा पर्व के मौके पर शुक्रवार शाम आपस में उलझे केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर और उद्योग मंत्री विपुल गोयल के बीच 20 साल पुरानी गहरी दोस्ती थी। इनकी यह दोस्ती जुलाई 2015 में बड़खल से भाजपा विधायक सीमा त्रिखा को मनोहर सरकार में मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) बनाने से पहले तक बरकरार थी। मगर जब गुर्जर ने विपुल गोयल को अंदर ही अंदर राजनीतिक राह में अपना प्रतिद्वंद्वी मानकर यह राजनीतिक चाल चली तो गोयल दोस्ती की छाया से एकदम बाहर आ गए और उन्होंने पार्टी के अंदर ही गुर्जर के समर्थन के बिना मनोहर लाल सरकार में उद्योग,वाणिज्य व पर्यावरण जैसे अहम विभाग लेकर कैबिनेट स्तर का पद पाया। हालांकि मंत्री पद पाने में गोयल को सीमा के सीपीएस बनने के बाद भी एक साल लग गया। गोयल सितंबर 2016 में मंत्री बने। यूं तो गोयल विधायक रहते भी गुर्जर का सामना करने लगे थे मगर जब मंत्री बन गए तो उन्होंने फरीदाबाद व पलवल जिला में गुर्जर विरोधियों को पार्टी के मंच पर अपने साथ ला खड़ा किया। इस क्रम में उनके साथ पूर्व चार बार रहे सांसद और मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के मीरापुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक अवतार भड़ाना भी खड़े हो गए। 

कृष्णपाल की दोस्ती के कारण अवतार के दुश्मन नंबर वन थे विपुल गोयल

 अवतार भड़ाना जब अप्रैल 2014 में कृष्णपाल गुर्जर के खिलाफ फरीदाबाद में लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे तो उन्होंने विपुल गोयल के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली थी। इसका कारण था कि तब विपुल गैर राजनीतिक होते हुए भी गुर्जर के चुनाव प्रबंधन में अहम भूमिका निभा रहे थे। राजनीति के जानकार बताते हैं कि गोयल ने तब दोस्ती की खातिर गुर्जर के चुनाव न सिर्फ अपनी तिजोरी के दरवाजे खोल दिए थे बल्कि भाजपा से तीन बार के पूर्व सांसद रामचंद्र बैंदा के सामने टिकट दिलवाने में भी अहम भूमिका अदा की थी। इसके चलते भड़ाना ने विपुल गोयल को खुले मंच से चुनौती दी थी मगर गुर्जर और विपुल गोयल की जोड़ी ने मोदी लहर में भड़ाना के खिलाफ बदरपुर बॉर्डर से हथीन बॉर्डर तक ऐसा चक्रव्यूह रचा कि भड़ाना चुनाव में 4.67 लाख मतों से पराजित हो गए। बाद में भड़ाना कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे।

अक्टूबर 2014 में कृष्णपाल-गोयल ने बांटी थी लोकसभा क्षेत्र की 9 टिकट

अक्टूबर 2014 में विधानसभा चुनाव के दौरान फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र में भाजपा की सभी 9 टिकट कृष्णपाल और विपुल गोयल की जोड़ी ने ही बांटी थी। तब गोयल ने खुद फरीदाबाद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत गए। हालांकि भाजपा 9 में से 3 ही सीट जीत पाई थी जबकि लोकसभा में सभी 9 सीटों पर जीती थी। टिकट वितरण के दौरान गोयल-कृष्णपाल ने अपनी मनमर्जी चलाई थी।

गोयल के विधायक बनते ही कृष्णपाल के तेवर बदलने लगे

1996 के विधानसभा चुनाव से बेशक विपुल गोयल अपनी दोस्ती के चलते कृष्णपाल गुर्जर के चुनाव का प्रबंधन करता था मगर जैसे विपुल गोयल खुद विधायक बनकर राजनीति में आए तो कृष्णपाल गुर्जर के तेवर बदलने लगे। गुर्जर को लगा कि तेजतर्रार गोयल उनसे आगे निकल जाएंगे और उन्होंने इसी कारण सीमा त्रिखा को  फरीदाबाद से मनोहर सरकार में प्रतिनिधित्व दिलाया। इससे विपुल गोयल के मन में भी गुर्जर के प्रति खटास पैदा हो गई। गोयल ने कई बार गुर्जर से मुलाकातों में यह भी कहा कि वे उनके साथ राजनीति न करें। जब 20 साल में दोस्ती नहीं छोड़ी तो अब भी नहीं छोड़ेंगे मगर गुर्जर अनिश्चितता के शिकार हो गए। गोयल का कहना भी ठीक था जब 2000 से 2004 तक तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला से गुर्जर के संबंध अच्छे नहीं रहे तो इसका विपरीत प्रभाव गोयल की व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ा मगर गोयल ने गुर्जर को नहीं छोड़ा।

अब दोनों को एक-दूसरे की हर बात लगती है गलत

बेशक दोनों मंच पर एक-दूसरे को बड़ा भाई,छोटा भाई कहते हों मगर मंच से अलग दोनों ही एक-दूसरे के लिए धारदार तलवार लिए बैठे रहते हैं। जब भी जिसका मौका लगता है, दोनों एक-दूसरे को राजनीतिक रूप से कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। इस क्रम में विपुल गोयल को दशहरा पर्व के दौरान जब गुर्जर व सीमा की जोड़ी का फैसला गलत नजर आया तो उन्होंने मंच से धार्मिक आयोजनों में राजनीति की आलोचना की। असल में सीमा त्रिखा के हस्तक्षेप से एनआइटी का दशहरा पर्व मनाने की उन लोगों को अनुमति नहीं दी गई जो वर्षों से इसका अयोजना करते आ रहे हैं। इसलिए पिछले दो साल से प्रशासन दशहरा का आयोजन कर रहा है। विपुल इसी बात का विरोध कर रहे थे और इसके नतीजे में दोनों मंत्री आपस में मंच पर ही उलझ गए।
 

साभार- सोशल मीडिया


बाकी समाचार