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नया हरियाणा

बुधवार, 21 नवंबर 2018

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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किशाऊ और रेणुका बांध के समझौते को दी मंजूरी

यमुना की सहायक नदियों पर बिजली का उत्पादन होगा.

Chief Minister Manohar Lal, Kishou and Renuka Dam, the total cost of all three projects is 9588.66 crores, naya haryana, नया हरियाणा

18 अक्टूबर 2018

नया हरियाणा

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किशाऊ और रेणुका बांध के लिए समझौता करने की सहमति प्रदान कर दी है। जिसे यमुना नदी की दो सहायक नदियों टोंस और गिरी नदी पर नई भंडारण क्षमता क्रमशः 1.04 मिलीयन एकड़ फुट(एमएएफ) और  0.404 एमएएफ पानी हो जाएगी। इसके अलावा, यह दो बांध क्रमशः 660 मेगावाट और 40 मेगावाट बिजली भी उत्पन्न करेंगे।

यहां यह उल्लेखनीय होगा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा 28 अगस्त को लखवार परियोजना के लिए एक समझौता ज्ञापन पर पहले हस्ताक्षर जा चुके हैं। सिंचाई और जल संसाधन विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि समझौते पर हस्ताक्षर करने से दिल्ली को अतिरिक्त कच्चे पानी की आपूर्ति करने का हरियाणा पर जो दबाव है वह कम हो जाएगा। किशाऊ परियोजना देहरादून (उत्तराखंड) और सिरमौर (हिमाचल प्रदेश) जिलों में टोंस नदी पर स्थित है।

जो यमुना नदी की सहायक नदी है बांध के भंडारण क्षमता 1.04 एमएएफ होगी और यह 660 मेगावाट बिजली उत्पन्न करेगा। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की लगभग 2950 हेक्टेयर भूमि जलमग्न हो जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) इस संयुक्त उद्यम की निष्पादन एजेंसी होंगी। 12 मई, 1994 के एमओयू के अनुसार भागीदार राज्यों द्वारा अपने हिस्से के अनुपात में पानी लिया जाएगा। जबकि बिजली की आपूर्ति उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को की जाएगी। उन्होंने कहा कि रेणुका परियोजना जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश में यमुना नदी की एक सहायक नदी गिरी नदी पर स्थित है।

इस बांध की भंडारण क्षमता 0.404 एमएएफ होगी और यहां 40 मेगावाट बिजली उत्पन्न होगी। हिमाचल प्रदेश की कुल 1216 हेक्टेयर भूमि जलमग्न हो जाएगी। एचपीपीसीएल इसकी निष्पादन एजेंसी होगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली रेणुका बांध से छोड़े जाने वाले पानी पर अपना दावा कर रही है। प्रारंभ में, दिल्ली की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रेणुका बांध से छोड़ा जाने वाला समस्त पानी दिल्ली को आवंटित करने का प्रस्ताव था।

लेकिन हरियाणा द्वारा आपत्ति के जाने के बाद अब यह प्रस्ताव है कि रेणुका स्टोरेज के निर्माण के कारण उपलब्ध होने वाला केवल अतिरिक्त पानी ही दिल्ली की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्राथमिकता पर उपलब्ध कराया जाएगा। जैसा कि ऊपरी यमुना नदी बोर्ड (यूवायआरबी) द्वारा निर्णय लिया गया है। इस प्रकार, गिरी नदी पर भंडारण के निर्माण के बिना जो पानी बह रहा है वह पहले की ही भांति वितरित किया जाएगा और भंडारण के निर्माण के कारण उपलब्ध होने वाला अतिरिक्त पानी ही दिल्ली को उपलब्ध कराया जाएगा। दिल्ली को प्राथमिकता होगी, लेकिन समस्त पानी पर नहीं।

इन तीनों परियोजनाओं की कुल लागत 9588.66 करोड़ रुपए है जिसमें से 90% राशि केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाएगी क्योंकि इन्हें राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित किया गया। हिस्सेदार राज्यों द्वारा बहन की जाने वाली शेष 10% राशि में हरियाणा सरकार अपने हिस्से के 458.52 करोड़ रुपए का भुगतान करेगी।


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