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नया हरियाणा

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018

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पढ़िए इनेलो के भीतर की लड़ाई इनेलो कार्यकर्ता की जुबानी!

अभय सिंह चौटाला और दुष्यंत चौटाला के बीच सत्ता संघर्ष की शुरूआत कैसे हुई.

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10 अक्टूबर 2018

सुरेंद्र माजरा

क्या है मंथन ?

 

इंडियन नेशनल लोकदल पार्टी का कार्यकर्ता जमीन पर काम करता आया है। पार्टी की छवि भी आम हरियाणवी की पार्टी के रूप में जानी जाती है।

 

सोशल मीडिया पर पार्टी कभी मुखर नहीं रही। वेबसाइट भी कभी विशेष रूप से संचालित और अपडेटेड नहीं रही कारण वही की पार्टी के नेताओं का सीधा जुड़ाव आमजन से रहा है, पार्टी की नीतियों का प्रचार प्रसार खुद कार्यकर्ताओं द्वारा किया जाता रहा है।

 

किशोर दुष्यन्त को जब चुनाव लड़ने के लिए अधिकृत किया गया तो कुछ लोग जिन्होंने पार्टी के नाम सोशल मीडिया पर अनाधिकृत छद्म पेज और ग्रुप बना रखे थे वो दुष्यन्त के संपर्क में आये तथा उन्हें सोशल मीडिया के काम के लिए राजी किया। इन लोगों ने अच्छा काम किया और दुष्यन्त का भरोसा जीता।

 

उन्हीं दिनों पार्टी का स्टेशनरी कैलेंडर इत्यादि का प्रिंट कंटेंट का काम पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ के सी बांगर किया करते थे। चौधरी ओमप्रकाश चौटाला और अजय सिंह चौटाला के जेल जाने के उपरांत इस काम पर फाइनल मोहर लगवाने के लिए डॉ बांगर ने जब अभय सिंह से संपर्क करना शुरू किया तो अभय सिंह ने किशोर दुष्यन्त पर भरोसा जताया और कहा कि ये चीज़े दुष्यन्त से फाइनल करवा लिया करें।

 

अब दूष्यन्त ने अभय सिंह से सोशल मीडिया पर काम करने के अधिकार लिए और अभय सिंह ने युवा दूष्यन्त पर भरोसा करके उन्हें अपनी तरफ़ से अधिकृत भी कर दिया कि सोशल मीडिया पर आप काम कीजिये।

 

इस बीच दूष्यन्त हिसार से सांसद चुने जा चुके थे। अब जब दुष्यन्त सांसद चुने गए और उनके खुद के राजनैतिक क्रियाकलाप आरंभ हुए। उसी वक़्त विदेशों में बैठे कुछ महत्वाकांक्षी व्यक्ति सोशल मीडिया के बहाने दूष्यन्त के अधिक नजदीक आये। अपनी व्यस्तताओं के चलते दूष्यन्त ने इन्हीं कुछ लोगों के हाथ मे सोशल मीडिया की कमान दे डाली। जैसे कैकई द्वारा मंथरा नाम की दासी ने राजा दशरथ के परिवार बर्बाद किया था वैसे ही इन महत्वकांशी व्यक्तियों ने दूष्यन्त की बुद्धि और विवेक को घेरना शुरू किया। अनाधिकृत पेज बनाकर पार्टी और अभय सिंह के खिलाफ टिप्पणी आने लगी। जब पार्टी के संज्ञान में ये बाते आई तो फर्जी पेज बन्द करवाये गए और पार्टी के दो प्रवक्ताओं रविंदर ढुल और प्रवीण अत्रे को ये काम दिया गया। लेकिन तब तक मंथरा रूपक विदेश में रहने वाली दासी कैकई रूपक दूष्यन्त के कान में फूंक मार चुकी थी।

 

रविंदर ढुल ने पार्टी के सोशल मीडिया पर एक्टिव कार्यकर्ताओं को खोजना शुरू किया और मंथन नाम का ग्रुप दूष्यन्त की देख रेख में तैयार किया। ये ग्रुप पहले पहल सोशल मीडिया के हर फ्रंट पर ठीक काम करता रहा। लेकिन मंथरा धीरे धीरे ग्रुप के कार्यकलापों पर हावी होती दिखी कैकेयी का सीधा आशीर्वाद होने से उसे खुलकर काम करने को भी मिला। और धीरे धीरे ग्रुप में केवल पार्टी के लिए काम करने वाले लोगों को अलग किया जाने लगा। सीधे दूष्यन्त से संपर्क होने के चलते युवा बहकावे में आते गए और पार्टी की नीतियों का प्रचार करने के लिए बनाए गए ग्रुप में केवल दूष्यन्त के नारे लागये जाने लगे। ग्रुप में सदस्य बढ़ते गए और इसी बीच कुछ कांग्रेसी और पार्टी विरोधी व्यक्ति भी ग्रुप में घुसते चले गए। अब दूष्यन्त की अगुवाई में मंथरा नें ग्रुप कई हिस्सों में बाँटणे शुरू किए। जो अधिक कट्टर और दुर्भावना से ग्रसित लोग थे उनको टॉप में रखा जाने लगा। ग्रुप में गलत बातों का विरोध करने वालों को बाहर किया जाता और जब व्यक्ति बाहर मुखर होता तो DJ नाम के नये ग्रीन ब्रिगेडियर से धमकी दिलवाई जाती। मंथन धीरे धीरे उत्पाती बंदरों के टोल में परिवर्तित होता गया जोअधिक उत्पाती होते गए उन्हें प्रमोट करके खागड की उपाधि दी जाने लगी। ज्यादातर खागड वे लोग थे जो कुंठित मानसिकता से ग्रसित हैं जिनमे से कुछ कांग्रेसी और कुछ पुराने लोकदली परिवारों से आते हैं।

 

मंथरा ने कैकेई की बुद्धि पर कब्जा कर लिया था और अब अपनी महत्वाकांक्षा को उछाल दी और ग्रुप में शगूफा छोड़ा गया कि युवा मुख्यमन्तरी हो दूष्यन्त को मुख्यमन्तरी होना चाहिए। ग्रुप्स में लोगों ने मुख्यमंत्र्ति के नारे लगाए।

 

और यही सब चलने लगा, युवा रोज रात को मुख्यमन्तरी बनकर सोने लगा, ग्रुप के सदस्यों ने अपनी इच्छा से कैबिनेट और OSD की उपाधियां धारण कर ली, इस बीच ग्रुप से निकाले गए कुछ लोगों ने अभय सिंह के नारे लगाने शुरू किए। चूंकि पार्टी का कोई भी वरिष्ठ नेता सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं था तो उनके संज्ञान में सही मामला आया ही नहीं। अंत मे जब कार्यकर्ता खुद ही नारे लगाने लगे तो शीर्ष नेताओं ने लताड़ लगानी शुरू की।

 

अब इस बात को युवाओं के जहन में भरा जाने लगा कि अभय सिंह युवाओं को दबा रहे हैं और इन ग्रुप्स में अभय और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ जहर उगला जाने लगा।

 

युवा मुख्यमन्तरी मुख्यमन्तरी के नारे का आनंद लेने लगा उधर पार्टी ने DJ की जिम्मेदारी इनसो को संभालने की लगाई थी भोले और उत्साही युवाओं को इनेलोवादी ना बनाकर दुष्यन्तवादी बनाया जाने लगा। छुटभैया व्यक्तियों द्वारा शीर्ष नेताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की जाने लगी। जो कार्यकर्ता मंथन में काम कर रहे कुछ कार्यकर्ताओं को यह बात पसंद नहीं आई और उन्होंने यह बात बड़े नेताओं को पार्टी ऑफिस में रखी और जब सारी बातों से पार्टी ऑफिस को बड़े नेताओं को रूबरू करवाया कि दुष्यंत जी गुमराह हो चुके हैं और वह केवल मात्र अपना प्रचार कराते हैं और बड़े नेताओं को बदनाम करने की साजिश रची जाती है मंथन के नाम से ग्रुप चल रहा है तो फिर जाकर के पार्टी ने इसके ऊपर थोड़ी सख्ती बरतनी शुरू करें, लेकिन यह लोग लाल लालच में इतने अंधे हो चुके थे इनको और कुछ नजर ही नहीं आया उसके परिणाम आज सबके सामने है पूरा लोकदल परिवार इनको बुगत रहा है परिणाम को भुगत रहा है

 

सोशल मीडिया पर एक्टिव युवकों ने मंथन के आदेश से 5-10 id बनाई हज़ारों पेज बनाये और दूष्यन्त के गुण गाये जाने लगे। लोगों के सामने इमेज तैयार की गई और त्यागी और महान जननायक के साथ नाम जोड़ा जाने लगा। लोगों को लगा कि ये युवक करिश्माई है लेकिन हक़ीक़त ये थी कि ये युवक अति महत्वाकांक्षी है।

 

मंथन केवल अपनी महत्वाकांक्षा की पूर्ति का साधन बना लिया गया। बड़ों के अपमान की आग यहां तक फैली की पार्टी जिनके नाम से खड़ी हुई जिस व्यक्तित्व को पूरा देश त्यागी और संघर्षशील व्यक्ति के नाम से सम्मान करता है उनकी ही जयंती पर होने वाली सम्मान दिवस रैली को अपमान दिवस में बदल डाला।

 

INLD को खड़ा करने में अपना सर्वस्व लगा देने वाले लाखों कार्यकर्ताओं और पार्टी की जान कहे जाने वाले चौधरी ओमप्रकाश चौटाला तक को अपमानित कर दिया गया।

 

मंथन द्वारा जो विष निकला उस से तैयार खागड 7 अक्टूबर की सम्मानदिवस रैली में किलकि और नारेबाजी करने वाले टोलों के सरदार बनाये गए थे। जो पांडाल में अलग अलग हिस्से में समूह बनाकर खड़े हुए और हंगामा किया।

 

मंथरा की चाल ने देश के उभरते हुए युवा नेतृत्व को इतना भटका दिया कि उनकी मुख्यमन्तरी बनने की लालसा में वो इस क़दर अंधे हुए की जननायक को सम्मान देने की बजाए रैली को शक्ति प्रदर्शन और हुल्लड़ की भेंट चढ़ा गए।

 

वो भूल गए जननायक को और उनके नाम से नारे लगाने की बजाए केवल दूष्यन्त को मुख्यमन्तरी बनाते रहे।

 

ना केवल पार्टी के कार्यकर्ता बल्कि देश और प्रदेश के हर पार्टी के राजनैतिक लोग दूष्यन्त और दिग्विजय की इस हरकत पर स्तब्ध रह गए।

 

पार्टी के नेताओं और खासकर अभय सिंह चौटाला को भरोसे में लेकर पार्टी और अभय सिंह चौटाला के साथ बहुत बड़ी गद्दारी की गई।

 

हरियाणा की जनता कुछ भी सहेगी लेकिन यूँ जननायक का अपमान नहीं सहेगी।

 

मंथन INLD की एक भूल।

 

 


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