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नया हरियाणा

बुधवार, 21 नवंबर 2018

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प्रधानमंत्री मोदी की सांपला रैली बदलेगी हरियाणा के राजनीतिक हालात

सांपला रैली से भाजपा ने बजाया चुनाव का बिगुल.

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9 अक्टूबर 2018

नया हरियाणा

हरियाणा की सियासत में गहमागहमी बढ़ती जा रही है. कांग्रेस और इनेलो जहां आपसी खींचतान में उलझी हुई है, वहीं भाजपा अपनी चुनावी रणनीति में अपने पैंतरे बैठाने में लीन है.
केंद्र की मोदी सरकार और हरियाणा की भाजपा सरकार पर ये आरोप लगते रहे हैं कि इन सरकारों की नीतियां किसान विरोधी हैं और खासकर हरियाणा में तो ये मैसेज गया हुआ है कि जाटों की विरोधी पार्टी है. इस मैसेज को पहुंचाने में इनेलो नेताओं और कांग्रेसी नेता हुड्डा का बड़ा योगदान है, परंतु इस मैसेज का दूसरा पक्ष या ध्रुवीकरण इन दोनों के खिलाफ भी जाता है. ऐसे में केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर यह दबाव साफ दिख रहा है कि वह केंद्र में किसानों को और हरियाणा में किसानों और जाटों को अपने खेमे में लाने में कामयाबी हासिल करे.
जिसकी शुरूआत दीनबंधु छोटूराम की प्रतिमा के अनावरण के मौके से की जा सकती है. हरियाणा की भाजपा सरकार ने पहली बार दीनबंधु छोटूराम के नाम पर किसी योजना की शुरूआत की है. पिछली सरकारों ने दीनबंधु छोटूराम की उपेक्षा ही की. हरियाणा की भाजपा सरकार ने दीनबंधु छोटूराम ग्रामोदय योजना के माध्यम से दीनबंधु की नीतियों को अपनाते हुए गांव को विकास के केंद्र में स्थापित करने की प्रक्रिया आरंभ की. इसके साथ-साथ छोटूराम के निवास स्थान गढ़ी सांपला को दीनबंधु छोटूराम नगर में रूप घोषित किया.
प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों में जनता की नब्ज को पकड़ने वाली शैली के लिए जाने जाते हैं. आज उनके भाषण पर पक्ष और विपक्ष सभी की नजरें गढ़ी रहेंगी. भाजपा के लिए सांपला की रैली इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि रोहतक लोकसभा सीट पर भाजपा मुख्य रूप से फोकस किए हुए है. 2014 के चुनाव में यहां से कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा ने जीत दर्ज की थी, जो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के बेटे हैं. ऐसे में लोकसभा चुनाव में अगर भाजपा रोहतक की सीट जाती है तो कांग्रेस का मनोबल पर दोहरी मार होगी और खासकर हुड्डा खेमे में भगदड़ मचना स्वाभाविक है.
मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा को सजा होने की भी पूरी संभावनाएं हैं. हालांकि ये सभी अभी कयास भर ही हैं. परंतु पूर्व मुख्यमंत्री के गढ़ में रैली को हलके में लेना नादानी ही कही जाएगी.
रोहतक में हुए दंगों के बाद गैर जाट वोटर हुड्डा परिवार से नाराज चल रहा है. रही सही कसर दीपेंद्र हुड्डा के मुहं से पंजाबी समाज के लिए निकले अपशब्दों ने पूरी कर दी. हरियाणा में जाट और गैर जाट के बीच मनमुटाव का बीज भले की भाजपा सांसद राजकुमार सैनी ने बोया था, परंतु उसे समय-समय पर खाद और पानी देने का काम यशपाल मलिक कर ही रहा है. सोशल मीडिया पर तो उन्हें भाजपा का दलाल तक कहा जा रहा है. खैर राजनीतिक समीकरण पल-पल बदलते-बिगड़ते हैं. ऐसे में भाजपा कांग्रेस और इनेलो की भीतरी फूट का कितना फायदा उठा पाती है, यह तो भविष्य ही बता पाएगा. 
 


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