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नया हरियाणा

बुधवार, 19 दिसंबर 2018

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जानिए गोहाना रैली में ओमप्रकाश चौटाला किसे बनाएंगे इनेलो का मुख्यमंत्री चेहरा!

अभय सिंह चौटाला और दुष्यंत चौटाला में से किसी एक नाम पर लग जाएगी मुहर.

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7 अक्टूबर 2018

नया हरियाणा

हरियाणा का प्रमुख विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) आज (रविवार) गोहाना में रैली के जरिये शक्ति प्रदर्शन करेगा। भूतपूर्व उपप्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी देवीलाल के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में यह रैली करके इनेलो अपने चुनावी अभियान का आगाज करेगा। यह इनेलो-बसपा गठबंधन की साझा रैली है, लेकिन यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री एवं बसपा सुप्रीमो मायावती रैली में भाग नहीं लेंगी। वहीं दूसरी ओर, इनेलो सुप्रीमो एवं पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला के रैली में शामिल होने के आसार हैं। चौटाला इन दिनों तिहाड़ जेल से 14 दिन की फरलो पर हैं। ऐसे में वे रैली में भाग ले सकते हैं। इनेलो से जुड़े सूत्रों ने इसकी पुष्टि तो की है, लेकिन वे अधिकारिक तौर पर कुछ नहीं बोल रहे। बताते हैं कि रैली के लिए बिहार के वरिष्ठ नेता शरद यादव के अलावा गुजरात के वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला को भी आमंत्रित किया गया है।
जेबीटी भर्ती मामले में चौटाला और उनके पुत्र अजय सिंह चौटाला के जेल जाने के बाद से प्रदेश में इनेलो की कमान अभय सिंह चौटाला के हाथ में है। देवीलाल की जयंती पर हर वर्ष इनेलो रैली करता है। इस बार भी गोहाना की यह रैली 25 सितंबर को होनी थी, लेकिन 3 दिन लगातार बारिश के कारण इसे स्थगित किया गया था।
राजनीतिक तौर पर इनेलो की इस रैली को काफी अहम माना जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण तो इसलिए भी है क्योंकि चौटाला लंबे अरसे के बाद राजनीतिक रैली में शामिल हो सकते हैं। वहीं, इस रैली के जरिये विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला भी अपना शक्ति प्रदर्शन करेंगे।
गोहाना रैली सियासत फिजा में एक नया इतिहास बना सकती है। क्योंकि सूत्रों के हवाले से खबर है कि ओमप्रकाश चौटाला यहां विधिवत रूप से पार्टी की कमान अभय सिंह चौटाला को सौंप सकते हैं। यह संदेश दुष्यंत चौटाला के समर्थकों तक भी पहुंच चुका है। जिसकी प्रतिक्रिया स्वरूप शनिवार को रैली स्थल पर अभय सिंह चौटाला की मौजूदगी में दुष्यंत चौटाला के नारे लगाए गए।
सोशल मीडिया पर दुष्यंत के लिए मुहिम
सोशल मीडिया पर प्रायोजित तरीके से भले ही दुष्यंत के फेवर में मुहिम चलाई जा रही है, परंतु ओमप्रकाश चौटाला हरियाणा की राजनीति में वर्तमान समय में सबसे सुलझे हुए और अनुभवी नेता माने जाते हैं। ऐसे में उनके निर्णय पर सवाल उठाने वालों की अपनी रणनीति या पैंतरा हो सकता है। दूसरी तरफ उनकी तरफ से ये आशंका या डर भी फैलाया जा रहा है कि चाचा भतीजा की जोड़ी एक साथ होगी या फिर जूतम-पजार होती नजर आएंगी। जबकि राजनीति में नेतृत्व मिलने के बाद सारी विरोधी आवाजें या सुगबुगाहट को विराम मिल जाता है।
संयम में दिखे अभय सिंह चौटाला
दुष्यंत चौटाला के समर्थक लंबे अर्से से अभय सिंह के खिलाफ भले ही मुहिम चला रहे हों, परंतु चाचा अभय सिंह चौटाला ने अभी तक काफी हद तक अपने संयम का परिचय दिया है। जो कि उनकी प्रचारित छवि के एकदम विपरीत है। ऐसे में ये कहा जा सकता है कि अभय सिंह चौटाला पहले की तुलना अब परिपक्व नेता के रूप में उभर रहे हैं। क्योंकि रैली स्थल का मुआयना कर रहे अभय सिंह चौटाला जब युवाओं के बीच पहुंचे तो युवाओं ने नारे लगाने शुरू कर दिए। भावी सीएम कैसा हो दुष्यंत चौटाला जैसा हो अजय सिंह चौटाला जिंदाबाद के नारे से गूंज उठा रैली स्थल। इन सबके बावजूद अभय सिंह ने आपा नहीं खोया और धैर्य के साथ वहां से चले गए।
राजनीति में बौखलाहट पर धैर्य हमेशा भारी पड़ा है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि युवा जोश की तुलना में राजनीतिक अनुभव भारी पड़ेगा। सभी घटना क्रम को देखते हुए संभावनाएं जताई जा रही हैं कि ओमप्रकाश चौटाला अभय सिंह चौटाला को इनेलो सुप्रीमो घोषित कर सकते हैं। जिस तरह भजनलाल ने अपने बेटे कुलदीप बिश्नोई को हजंका की कमान सौंपते वक्त सिर पर हाथ रखा था, उसी तरह अभय सिंह चौटाला के सिर पर हाथ रखा जा सकता है।
भीतरी खींचतान पर लगेगा विराम
ओमप्रकाश चौटाला के निर्णय पर शक करने वालों के प्रति सहानुभूति ही हो  सकती है। क्योंकि उन्होंने धृतराष्ट्र जैसे विशेषणों से नवाजा है। जबकि पहले से ही लगभग तय लग रहा था कि इनेलो की कमान अभय सिंह चौटाला को सौंपी जाएगी। परंतु सोशल मीडिया पर काल्पनिक प्रचार के माध्यम से युवा को मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर प्रस्तुत किया गया। आज अधिकारिक घोषणा के बाद इस भीतरी खींचतान पर विराम लग सकता है।
 


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