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नया हरियाणा

बुधवार, 14 नवंबर 2018

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भावांतर भरपाई योजना के तहत हरियाणा सरकार 1950रु में खरीदेगी बाजरा

खरीफ सीजन 2018 के दौरान 6,20,699.24 मीट्रिक टन बाजरे का उत्पादन होने की संभावना है।

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29 सितंबर 2018

नया हरियाणा

हरियाणा में बाजरा खरीद के लिए राज्य सरकार ने नया फार्मूला निकाला है। किसानों का सारा बाजरा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने के बजाय सरकार ने इसे ‘भावांतर भरपाई’ योजना से जोड़ा है। अभी तक यह योजना केवल आलू, प्याज, टमाटर और फूल गोभी के लिए ही थी। खट्टर कैबिनेट ने बाजरा भी इसी तर्ज पर खरीदने का फैसला लिया है।

  • चंडीगढ़, 25 सितंबर- हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में भावांतर भरपाई योजना के तहत खरीफ विपणन सीजन 2018-19 के दौरान बाजरे की खरीद 1950 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करने की स्वीकृति प्रदान की गई।
  • कृषि विकास अधिकारियों द्वारा किए गए क्षेत्र सत्यापन के अधार पर कृषि विभाग द्वारा प्रस्तुत सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार कुल 3,40,910.54 हैक्टेयर क्षेत्र में बाजरे की बुआई की गई है, जिससे खरीफ सीजन 2018 के दौरान 6,20,699.24 मीट्रिक टन बाजरे का उत्पादन होने की संभावना है। लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरण हेतु एक लाख मीट्रिक टन बाजरे की खरीद करने का निर्णय लिया गया है जिसके लिए केन्द्र सरकार की 21 मार्च, 2014  की नीति के अनुसार केन्द्र सरकार द्वारा सभी आकस्मिक तथा वैधानिक शुल्कों के साथ किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के भुगतान समेत पूरी प्रतिपूर्ति की जाएगी। बकाया 5,20,699.24 मीट्रिक टन की खरीद भावांतर भरपाई योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।

सूत्रों का कहना है कि सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि बाजरे की खरीद में लगने वाले समय और संसाधनों को बचाया जा सके। इस प्रक्रिया में सरकार को आर्थिक तौर पर भी फायदा होगा। प्राइवेट कंपनियां व आढ़ती जो बाजरा खरीदेंगे, उसे रखने का इंतजाम भी वह खुद करेंगे। वहीं, सरकारी एजेंसियां यदि खरीद करती हैं तो बाजरा को स्टॉक करके रखने में दिक्कत आती है। इस समय राज्य के पास इतने गोदाम उपलब्ध नहीं हैं कि बाजरा रखा जा सके।
सरकार के अनुमान के अनुसार इस बार राज्य में 6 लाख 20 हजार 699 मीट्रिक टन बाजरे का उत्पादन होगा। एक लाख मीट्रिक टन की खरीद सरकार पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) के तहत गरीब लोगों में मोटे अनाज के तौर पर बांटने के लिए करेगी। शेष बाजरे की खरीद होगी तो मंडियों में ही, लेकिन यहां केवल उन्हीं किसानों का बाजरा खरीदा जाएगा, जिन्होंने अपनी इस फसल को पंजीकृत करवाया है। मार्केटिंग बोर्ड की ओर से पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। करीब 1 लाख 26 हजार किसानों द्वारा रजिस्ट्रेशन करवाए जाने की सूचना है। विधानसभा में यह मुद्दा उठ चुका है और सरकार ने स्पष्ट किया था कि मंडियों में आने वाला किसानों का पूरा बाजरा खरीदा जाएगा।
8 क्विंटल तक की कैप
आमतौर पर एक एकड़ जमीन में 6 से साढ़े 6 क्विंटल तक बाजरे का उत्पादन होता है। कुछ किसान हाइब्रिड बीज का इस्तेमाल करने लगे हैं, जिससे यह साढ़े 7 क्विंटल तक पहुंच जाता है। खट्टर कैबिनेट ने इसके लिए प्रति एकड़ 8 क्विंटल की कैप लगाई है। यानी किसी किसान के पास यदि 5 एकड़ जमीन है और उसने पंजीकरण करवाया हुआ है तो वह 40 क्विंटल बाजरा मंडियों में बेच सकेगा।
यह होगा फार्मूला
केंद्र ने बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1950 रुपये तय किया है। वहीं, खट्टर कैबिनेट ने इसका रिजर्व प्राइस 1500 रुपये तय किया है। पहली अक्तूबर से मंडियों में खरीद शुरू होगी। रोजाना मार्केट में रेट डिस्पले होंगे। डिस्पले होने वाले रेट और एमएसपी के बीच का अंतर सरकार किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में देगी। उदाहरण के तौर पर यदि किसी दिन बाजरे का रेट 1550 रुपये होता है, तो भावांतर भरपाई योजना के तहत सरकार की ओर से 400 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किसानों को पैसा दिया जाएगा। सरकार ने एचसीएस अधिकारियों की मंडीवार ड्यूटी लगाई है। मंडियों में हैफेड और वेयर हाउसिंग काॅर्पोरेशन और प्राइवेट एजेंसियों द्वारा बाजरा खरीद की जाएगी।

“बाजरा खरीद के लिए सरकार ने तैयारियां कर ली हैं। जिन किसानों ने पंजीकरण करवाया हुआ है, उनका मंडियों में आने वाला सारा बाजारा सरकार खरीदेगी। भावांतर भरपाई योजना के तहत सरकार 1950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बाजरे की खरीद करेगी। किसी तरह की दिक्कत किसानों को नहीं आने दी जाएगी। 
-कर्णदेव काम्बोज, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री, हरियाणा


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