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नया हरियाणा

बुधवार, 21 नवंबर 2018

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7 अक्तूबर की गोहाना रैली में खुल सकता है इनेलो की सत्ता का 'ग्रीन कार्ड'

ओमप्रकाश चौटाला सौंप सकते हैं पार्टी की कमान.

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25 सितंबर 2018

प्रदीप डबास

मिशन 2019 की तैयारियों में जुटी इनेलो के लिए 25 सितंबर के बजाय 7 अक्तूबर की तारीख बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। गोहाना रैली में चौटाला परिवार की एकजुटता का इम्तिहान होना है और साथ ही ये भी तय हो जाएगा कि बसपा के हाथी ने चश्मा ठीक से पहना भी है या नहीं।
इनेलो-बसपा गठबंधन को लेकर कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने इस गठबंधन के चलने को लेकर शुरू से ही सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। अभी कुछ दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि बसपा सुप्रीमो से कांग्रेस की बातचीत जारी है। जल्द ही जनता को खुशखबरी मिलेगी। उन्होंने कहा कि इनलो और बसपा का समझौता बुलबुले की तरह है।  असल मे इनलो और बीजेपी आपस में मिले हुए हैं।
अब देखना यह होगा कि चुनाव के समय तक गठबंधन बना रहता है या नहीं।

गोहाना की धरती 25 सितंबर को होने वाली रैली भारी बारिश के कारण स्थगित होकर अब 7 अक्तूबर को होगी। यह रैली तय कर देगी कि इनेलो की राजनीति किस ओर जाने वाली है। इनेलो के लिए चौधरी देवीलाल का जन्मदिन सम्मान दिवस के रूप में ताकत दिखाने का दिन होगा। इनेलो प्रदेश में बड़ी रैलियां करने के लिए जानी जाती है। ये हो सकता है कि रैली इस बार भी अच्छी हो, लेकिन किसके लिए ये तो उस वक्त मंच पर मौजूद लोग ही जानते होंगे...क्योंकि इस बार इनेलो की रैली राजनीतिक कैरियर का सवाल होने जा रही है। ना सिर्फ पार्टी के लिए बल्कि मंच पर मौजूद परिवार के लोगों के लिए भी। समझ रहे हैं ना आप। 
जी हां, इसी का जिक्र कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर कर रहे हैं। अशोक तंवर का कहना है कि कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है। बल्कि इनलो में चाचा भतीजा में गुटबाजी है।
दूसरी तरफ ये रैली चौटाला परिवार की एकजुटता के लिए इम्तिहान साबित हो सकती है। ये रैली परिवार के लोगों का कद तय करने जा रही है। ये रैली बता देगी कि चौधरी देवीलाल की राजनीतिक विरासत का असली हकदार कौन होगा। हालांकि रैली के कुछ पोस्टरों में दुष्यंत चौटाला दिखाई नहीं दे रहे हैं तो इनसो के पोस्टरों से अभय सिंह चौटाला गायब हैं, लेकिन ये तो मंच तय करेगा कि किसका कद क्या है। बताया जा रहा है कि पार्टी का युवा कार्यकर्ता इसे काफी गंभीरता से ले रहा है। ऊंट किस करवट बैठेगा, ये तो समय ही बता पाएगा। अनुभव की जीत होगी या युवा जोश बाजी मार जाएगा।
रक्षा बंधन से पहले मायावती से राखी बंधवाकर आए अभय सिंह चौटाला की राखी की लाज मायावती रैली में पहुंचकर रख पाती हैं या नहीं ये भी देखने की बात होगी। हालांकि जब सवाल उठता है तो जवाब ऐसा मिलता है कि समझ जाओ कि रैली के मुख्य वक्ता अभय चौटाला ही होने जा रहे हैं। मतलब मायावती का रैली में पहुंचना मुश्किल। अब अभय चौटाला भले ही रैली के मुख्य वक्ता रहें लेकिन हाथी वाले तो बहन जी को सुनकर ही खुश होते हैं।
इनेलो का पुश्तों के साथी रहे बादलों से भी नाता टूट चुका है। मायावती का पहुंचना संशय में है लेकिन चंद्रबाबू नायडू समेत तमाम और नेता भी होते हैं जो चौधरी देवीलाल के जन्मदिन पर होने वाले जलसे का मंच सांझा करते हैं। 
वैसे राजनीति कहती है कि मौके पलट कर नहीं आते। अभय चौटाला के लिए ये पार्टी में अपना कद बताने का वक्त है। साथ ही वक्त उनके लिए भी है जो पोस्टरों में कम दिखाए गये हैं। ये मौका समर्थकों के भी खुलकर सामने आने का हो सकता है। मतलब इनेलो के भीतर की राजनीति का गणित समझना है तो गोहाना रैली के मंच के साथ-साथ पंडाल में बैठे समर्थकों पर भी पैनी निगाह रखनी होगी।
 


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