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पढ़िए यूएन ( यूनाइटेड नेशन) की जन्मकुंडली और 1945 में मिली भारत को आजादी

1945 में जब यूएन की स्थापना हुई तो भारत को एक इंडिपेंडेंट मेंबर के रूप में चुना गया।

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24 सितंबर 2018

मेनका चौधरी

यूनाइटेड नेशन, यह नाम सभी ने सुना होगा। दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण ऑर्गेनाइज़ेशन या यूं कहना भी बेहतर होगा कि सबसे बड़ी पंचायत। आखिर ये यूनाइटेड नेशन है क्या और इसे क्यों और कब बनाया गया? और यूएन क्या काम करता है और किस तरह से काम करता है?

यूएन की स्थापना 24 ऑक्टोबर 1945 को युएस के सैन फ्रांसिस्को शहर में 51 देशों को लेके इस उम्मीद के साथ कि गई थी,कि दुनिया में शांति बनी रहे और दुनिया को तीसरा विश्वयुद्ध ना देखना पड़े।

और आज यूएन के सदस्य देशों की संख्या 193 है,याने यूएन की पहुंच दुनिया के तकरीबन हर कोने में है। भारत शुरुवाती 51 देशों में से एक है जिसने यूएन की स्थापना की थी। हम फाउंडर मेम्बर हैं।

अब सोचने वाली बात ये है कि यूएन की स्थापना 1945 में हुई और भारत को आज़ादी 1947 में मिली. उसके बावजूद भी 1945 में जब यूएन की स्थापना हुई तो भारत को एक इंडिपेंडेंट मेंबर के रूप में चुना गया। इसका मतलब यह बनता है कि ब्रिटिशर्स सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद ही, भारत को आज़ाद करने का मन बना चुके थे।लेकिन ना तो ये बात हमें पढ़ाई जाती है, ना तो ये बात हमें बताई जाती है।

यहाँ यह भी पता होना चाहिये कि यूएन वो पहली ऑर्गेनाइज़ेशन नहीं है जिसकी स्थापना विश्व शांति को ध्यान में रख के की गई. यूएन से पहले और प्रथम विश्वयुद्ध के बाद भी, एक ऑर्गेनाइज़ेशन की स्थापना की गई थी. जिसे लीग ऑफ नेशन के नाम से जाना जाता था। और उसका उद्देश्य भी विश्व शांति बनाए रखना था। लेकिन वह ऑर्गेनाइज़ेशन अपने उद्देश्य को पाने में पूरी तरह नाकाम रही और उसके फलस्वरूप दुनिया को सेकंड वर्ल्ड वॉर देखना पड़ी।

यूएन का हेडक्वार्टर अमेरिका के न्यू यॉर्क शहर में है। और इसके अलावा भी यूएन के 3 और हेडक्वार्टर हैं, जिनेवा( स्विट्जरलैंड), विएना (ऑस्ट्रिया) और नैरोबी (केन्या) । और ये सभी जगह इंटरनेशनल टेरेटरी कहलाती है और यहाँ पर अंतरराष्ट्रीय कानून लागू होते हैं।

अब चूंकि यूएन एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है तो हर अंतरराष्ट्रीय संगठन की तरह ही यूएन का भी अपना अलग ध्वज है, अपने अलग नियम हैं और अपना अलग संविधान है। यूएन के संविधान के अनुसार यूएन के 6 प्रिंसिपल ऑर्गन्स हैं, और असल में ये 6 प्रिंसिपल ऑर्गन मिलके यूएन बनाते हैं।

1 - जनरल असेंबली

( ये नए मेंबर्स को एडमिशन देना, बजट अलॉट करना, डिस्कशन करना और यूएन के सेक्रेटरी जनरल का चुनाव करने का काम करती है)

2. - यूएन सेक्रेटेरिएट

( असल में ये यूएन की एडमिनिस्ट्रेटिव विंग है, पर इसके अलावा ये जनरल असेंबली की हर साल होने वाली एनुअल मीटिंग जो कि सितंबर-अक्टूबर महीने में होती है, जहाँ आप सब वर्ल्ड लीडर्स को स्पीच देते सुनते हैं. जिस के लिए एजेंडा तैयार करने का भी काम करती है)

3 - इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस

( अगर किसी भी दो कंट्रीस के बीच में किसी भी तरीके का विवाद होता है तो उसे यहीं सुलझाया जाता है। और अभी की कंडीशन में धरती पर इसके ऊपर कुछ भी नहीं है।)

4 - सिकियोरिटी काउंसिल

( ये अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और शांति बनाए रखने का काम करती है, और दुनिया के पांच देश अमेरिका,रशिया,फ्रांस,ब्रिटेन और चाइना इसके परमानेंट मेंबर है और इनके पास वीटो पॉवर होता है. यानी अगर यूएन से किसी भी तरीके का आदेश पास कराना है तो इन पांचों देशों की परमिशन ज़रूरी है, अगर इन पांचों देशों में से कोई एक देश भी अपने वीटो पॉवर का यूज़ करता है तो उस आदेश को यूएन से पास नहीं कराया जा सकता)

5 - यूएन इकोनॉमिक एन्ड सोशल काउंसिल

6 - यूएन ट्रस्टीशिप काउंसिल

विश्वशांति के अलावा यूएन के कुछ और उद्देश्य भी हैं जैसे इकोनॉमिक लॉ, इकोनॉमिक सिकियोरिटी, इकोनॉमिक डेवलपमेंट,सोशल प्रौग्रेस,ह्यूमन राइट, सिविल राइट्स, पॉलिटिकल फ्रीडम एन्ड प्रमोट डेमोक्रेसी और यह सारे उद्देश्य हमारी पॉलिटिकल पार्टियों के मेनिस्फेस्टो में किये गए वादों की तरह नहीं होते हैं. यूएन इन्हें बहुत स्ट्रिक्टली और सीरियसली फॉलो करता है।

इन सभी उद्देश्यों को पूरा कराने की ज़िम्मेदारी यूएन के सेक्रेटरी जनरल की होती है, जिस तरह यूएन दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऑर्गेनाइज़ेशन है उसी तरह यूएन का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति यूएन का सेक्रेटरी ऑफ जनरल होता है।

यूएन का सेक्रेटरी ऑफ जनरल, जनरल असेंबली द्वारा सिकियोरिटी काउंसिल के रिकमंडेशन पर चुना जाता है, लेकिन अगर जनरल असेंबली को लगता है कि ये रिकमंडेशन ठीक नहीं है तो वो रिजेक्ट भी कर सकती है।

और यह प्रक्रिया बार बार चलती रहती है, जब तक के सेक्रेटरी ऑफ जनरल का चुनाव ना हो जाए।

अभी यूएन के सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुटरेस हैं।

विश्वशांति स्थापित करने और इन सब उद्देश्यों की प्राप्ती के लिये यूएन आर्मी की मदद लेता है, अब चूंकि यूएन की अपनी कोई भी आर्मी नहीं है, इसलिये यूएन अपने सदस्य देशों की आर्मी को अपने झंडे तले भेजता है।

तो क्या यूनाइटेड नेशन के सेक्रेटरी जनरल ग्लोबल हेड की तरह काम करते हैं? जी नहीं, यूएन अगर कोई फैसला लेता है तो यूएन के सेक्रेटरी ऑफ जनरल उस कंट्री के हेड से बात करते हैं, और उस फैसले को अप्लाई करने की जवाबदारी उस देश के हेड की ही होती है। लेकिन अगर वो देश उस फैसले को अप्लाई नही कर रहा है और वो देश कुछ ऐसा कर रहा है जो मानवता के सख्त खिलाफ है तो फिर यूएन अपनी आर्मी भेजता है।


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