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नया हरियाणा

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समाज को गुमराह करने का मायाजाल बुन रहे हैं यशपाल मलिक

यशपाल मलिक किसी निर्धारित प्लानिंग की तरह काम करने के बजाए टालमटोल की कार्य नीति अपनाते हुए जाटों को गुमराह कर के खुद की लीडरशिप चमकाने के 1 सूत्रीय कार्यक्रम पर चल रहे हैं. रोहतक में हुई समिति की बैठक में जो 8 फैसले लिए गए उनमें से एक भी फैसला ऐसा नहीं है जो जाटों को आरक्षण दिलाने के मामले में मील का पत्थर साबित होने की संभावना रखता हो।

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5 दिसंबर 2017

कुलदीप श्योराण

अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक प्रदेश में जाट आरक्षण के मामले को लंबा खींचने और कैप्टन अभिमन्यु को बदनाम करने की रणनीति पर फोकस करके काम कर रहे हैं यशपाल मलिक किसी निर्धारित प्लानिंग की तरह काम करने के बजाए टालमटोल की कार्य नीति अपनाते हुए जाटों को गुमराह कर के खुद की लीडरशिप चमकाने के 1 सूत्रीय कार्यक्रम पर चल रहे हैं कल रोहतक में हुई समिति की बैठक में जो 8 फैसले लिए गए उनमें से एक भी फैसला ऐसा नहीं है जो जाटों को आरक्षण दिलाने के मामले में मील का पत्थर साबित होने की संभावना रखता हो।
 यशपाल मलिक ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जन्मदिवस पर 23 दिसंबर से आंदोलन का पहला चरण शुरू करने का ऐलान किया। इसके बाद जनवरी के अंतिम सप्ताह में बड़े आंदोलन की तारिख फाइनल करने की बात कही।वे  मामले को सिर्फ लंबा खींचने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

जसिया में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की मीटिंग में किया गया। मीटिंग की अध्यक्षता समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने की। इस दौरान सर्वसम्मति से आठ प्रस्ताव भी पारित किए गए। इन सभी प्रश्नों का गहराई से अवलोकन करने पर पता चलता है कि यशपाल मलिक अपनी मनमर्जी के एजेंडे पर काम कर रहे हैं वह जहां एक तरफ सरकार को गिरने से बच रहे हैं वही खुद के सियासी प्यार जमाने की थ्योरी पर अधिक काम कर रहे हैं।

प्रस्ताव 1. हरियाणा में प्रदेश स्तरीय आरक्षण के लिए सभी जिलों के कुछ गांव से सैंपल सर्वे कराकर उसके साथ जाट आरक्षण से संबंधित आंकड़ों के साथ दिसंबर 2017 के अंतिम सप्ताह में पिछड़े आयोग को दिए जाएंगे।
खरी खरी बात यह है कि कुछ गांव का सैंपल सर्वे लेने का कोई फायदा नहीं है इन सर्वे का ना तो कानूनी तौर पर महत्व है और ना ही इसका कोई सकारात्मक परिणाम हासिल होने वाला है अगर यशपाल मलिक वास्तव में सही आंकड़े सरकार और कोर्ट के सामने पेश करना चाहते तो 2 साल के आंदोलन के दौरान हुए हर गांव के आंकड़े जुटाकर कोर्ट के सामने पेश करते ऐसा करने पर ही जाटों को आरक्षण हासिल होने का सही रास्ता निकलता। कुछ गांवों का सैंपल सर्वे कराकर यशपाल मलिक सिर्फ जाटों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं

प्रस्ताव 2. सभी जिलों के पदाधिकारी अपने अपने जिलो से सैंपल सर्वे का कार्य 22 दिसंबर 2017 तक पूरा कर समिति को सौंपेंगे।
खरी खरी बात यह है कि यह सैंपल सर्वे सिर्फ समाज के लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए किया जा रहा है इस सैंपल का जाटों को किसी भी तरह से कोई फायदा होने वाला नहीं है। इस सर्वे के जरिए सिर्फ यशपाल मलिक के चमचे खुद की राजनीति को चमकाने के लिए इस्तेमाल करने वाले हैं।

प्रस्ताव 3. हरियाणा सरकार की अपनी रिपोर्ट 31 दिसंबर 2017 तक पूरी करे और हरियाणा सरकार व पिछड़ा वर्ग द्वारा सर्वे गांवों से इकट्ठा करे न कि सरकारी दफ्तरों से।
खरी खरी बात यह है कि सरकार यशपाल मलिक के किसी भी तरह के दबाव में आने वाली नहीं है यशपाल मलिक के साथ प्रदेश सरकार की पूरी सेटिंग है और इसी के तहत सिर्फ सरकार को आगरे करके ही यशपाल मलिक लीपापोती करने का काम कर रहे हैं।

प्रस्ताव 4. 23 दिसंबर को गांव जसिया में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण के जन्मदिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सभी जिलों में आंदोलन के लिए प्रचार प्रसार शुरू किया जाएगा।
 जनवरी 2018 के अंतिम सप्ताह में आंदोलन का स्थान व दिल्ली कूच की तारीख का भी एलान होगा।
खरी खरी बात यह है कि दिसंबर और जनवरी में यशपाल मलिक सिर्फ प्रचार का हथकंडा अपनाकर सिर्फ टाइम पास करने का काम करेंगे। जनवरी के अंत में फरवरी या मार्च का नाम लेकर मामले को 4 महीने तक लंबित करने का खेल खेला जाएगा।

प्रस्ताव 5. सभी जिलो में प्रचार प्रसार के दौरान जो लोग संस्थान का विरोध व रैली पर हमला करने वाले हरियाणा सरकार के मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के इशारे पर समाज तोडऩे की असलियत समाज के सामने बताई जाएगी। खरी खरी बात यह है कि यशपाल मलिक कैप्टन अभिमन्यु को Khalnayak साबित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। यशपाल मलिक जाट समाज में कैप्टन अभिमन्यु को पूरी तरह से बदनाम करके आरक्षण आंदोलन के दौरान गिरफ्तार युवकों के लिए जिम्मेदार ठहराना चाहते हैं।

प्रस्ताव 6. हरियाणा सरकार वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु को तुंरत पद से बर्खास्त करें, क्योंकि वह सरकारी शक्तियों का इस्तेमाल कर निर्दोष लोगों को जेल भिजवाने व समाज को गुमराह कर रहे है।
खरी खरी बात यह है कि भाजपा सरकार कैप्टन अभिमन्यु को बर्खास्त करने वाली नहीं है।यह मांग करके यशपाल मलिक ने सिर्फ कोरी राजनीतिक चाल चलने का काम किया है।

प्रस्ताव 7. गांव समैण में सघर्ष समिति की रैली में हुए जानलेवा हमले के दोषियों को गिरफ्तार करें।
खरी खरी बात यह है कि इस मामले में पुलिस अपनी जांच कर रही है और कुछ आदमियों को गिरफ्तार भी किया गया है। यशपाल मलिक के दबाव से इस मामले में कुछ भी अलग नहीं होने वाला है

प्रस्काव 8. जाट सेवा संघ कार्यालय का निर्माण शुरू कर दिया गया और भवन का निर्माण बंसत पंचमी 2018 में शुरू होगा। खरी खरी बात यह है कि यह प्रस्ताव करने के लायक ही बात ही नहीं थी मार्च में होने वाले निर्माण कार्य से पहले दो मीटिंग और होनी है इसलिए इस प्रस्ताव का कोई औचित्य नहीं था।
खरी खरी बात यह है कि समिति की बैठक से यह बात जगजाहिर हो गई है कि यशपाल मलिक जाटों को आरक्षण दिलाने के मामले में बिना किसी ब्लूप्रिंट के काम कर रहे हैं। वह अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए कहीं ना कहीं सत्ता के गलियारों से सेटिंग करके ही जाट समुदाय की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। यशपाल मलिक अभी तक ने तो मिले चंदे का हिसाब दे रहे हैं और ना ही जिलों में बंद युवकों की रिहाई के लिए सरकार पर कोई प्रेशर बनने बनाने का काम कर रहे हैं। यशपाल मलिक ने अपने खिलाफ तो देशद्रोह का मामला वापस करवा लिया लेकिन अन्य सैंकड़ों युवकों की रिहाई के लिए उन्होंने कोई कार्य नहीं किया। जाट आरक्षण आंदोलन के मामलों में फंसे लोगों के परिजन ही कोर्ट के धक्के खा रहे हैं ।

यशपाल मलिक का अभी तक एक भी कोर्ट में उपस्थित नहीं होना यह बताता है कि वह सिर्फ अपने एजेंडे के तहत काम कर रहे हैं और उनका जाट समुदाय की बेहतरी या आरक्षण से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है।

 

(यह लेख वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप श्योराण के संपादकीय पर आधारित है।)

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