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नया हरियाणा

बुधवार, 21 नवंबर 2018

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दुष्यंत चौटाला ने निकाला चाचा अभय सिंह चौटाला के चक्रव्यूह का तोड़

इनेलो पार्टी में आपसी खींचतान चरम पर, पार्टी दोफाड़ होने के मुहाने पर खड़ी है।

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19 सितंबर 2018

नया हरियाणा

अजय चौटाला व अभय चौटाला परिवार के बीच बढ़ती जा रही है जंग

हरियाणा के मुख्य विपक्षी दल इनेलौ के कुनबे में इस समय भीतर ही भीतर घात प्रतिघात का माहौल चरम पर है । पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के लिए वही दुविधा की घड़ी सिर पर आ खड़ी हुई है , जो घड़ी आज से तीस साल पहले पार्टी के संस्थापक पूर्व उप प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के सामने आ खड़ी हुई थी । तब चौधरी देवीलाल को अपने सबसे बड़े बेटे ओमप्रकाश चौटाला और तीसरे नंबर के बेटे रणजीत सिंह में से किसी एक को अपना उत्तराधिकारी चुनने की चुनौती थी और अंत में चौधरी देवीलाल ने ओमप्रकाश चौटाला को अपना उत्तराधिकारी चुन लिया था ।

उत्तराधिकार की इस जंग की वजह से चौधरी देवीलाल को अपने कई विश्वस्त सिपहसालारों से भी हाथ धोना पड़ा था । अब वही हालत चौधरी ओमप्रकाश चौटाला के सामने भी आ खड़े हुए हैं । चौधरी ओमप्रकाश चौटाला और उनके बड़े बेटे अजय सिंह चौटाला के जेल चले जाने के बाद वैसे तो उनके छोटे बेटे अभय सिंह चौटाला को पार्टी की बागडौर मिल गई थी , लेकिन जिस तेजी के साथ अजय सिंह के बेटों - दुष्यंत सिंह चौटाला (सांसद) व दिग्विजय सिंह चौटाला ( इनेलो की छात्र विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष) ने पार्टी पर पकड़ बनाई है और प्रदेश के यूथ में अपनी हैसियत कायम की है , उससे अभय सिंह चौटाला खुश नहीं हैं ।

दुष्यंत चौटाला के समर्थकों द्वारा खुले तौर पर उन्हें मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर पेश किया जाना अभय सिंह चौटाला और उनके समर्थकों को नागवार लग रहा है । पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला तक भी यह मामला पहुंचा है , लेकिन वे तय नहीं कर पा रहे कि किसे अपना उत्तराधिकारी बनाये और किसे घर बैठने को कहें । पार्टी धीरे धीरे दो धड़ों मे बंटती हुई साफ नजर आ रही है । हाल ही में कैथल में दुष्यंत व दिग्विजय चौटाला के नेतृत्व में हुए इनसो के राज्य स्तरीय समारोह से अभय सिंह चौटाला के दूरी बना कर रहने के बाद से चौटाला परिवार में चल रही रस्साकसी व आपसी मतभेद की बातें आम कार्यकर्त्ताओं की जुबान पर हैं ।

बताते हैं कि अभय सिंह चौटाला ने पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा की मार्फत सरकुलर जारी कराया है कि भविष्य में बिना उनकी पूर्व अनुमति के कोई भी नेता कोई बड़ा कार्यक्रम या समारोह आयोजित नहीं करेगा और न ही मीडिया में ही कोई बयानबाजी करेगा । बताया जाता है कि इसका मकसद दुष्यंत व दिग्विजय सिंह की बढ़ती गतिविधियों पर अंकुश लगाना है । उधर दुष्यंत व दिग्विजय चौटाला ने इसकी काट के तौर पर 'जननायक सेवा दल' नामक संगठन को फिर से पुनर्जीवित कर दिया है , ताकि इस संगठन के बैनर तले वे अपनी गतिविधियां जारी रख सकें ।

अभय सिंह चौटाला विरोधी नेताओं व कार्यकर्ताओं को छांट छांट कर इस संगठन का पदाधिकारी बनाया जा रहा है । अगर चुनाव तक यह प्रतिदंद्धिता यूं ही चलती रही तो कोई बड़ी बात नहीं कि पार्टी मुख्यमंत्री पद को लेकर दोफाड़ हो जाए और बुढ़ापे के आखिरी दिनों में चौधरी ओमप्रकाश चौटाला को एक और बड़ा सदमा झेलना पड़े । बाकी टिकटों के बंटवारे को लेकर भी पार्टी में मारामारी की नौबत आ सकती है । चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर तो इस सब हालात का विपरीत प्रभाव पड़ेगा ही पड़ेगा ।


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