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नया हरियाणा

बुधवार, 21 नवंबर 2018

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सस्ती बिजली भाजपा का मास्टर स्ट्रोक और विपक्ष को लगा जोर का झटका

मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने बिजली में राहत देकर विपक्ष के मुंह पर पहला पंच जड़ दिया है.

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18 सितंबर 2018

प्रदीप डबास

सूबे की मनोहर सरकार ने 2019 के चुनावी मैदान में और करंट लाने के लिए मास्टर स्ट्रोक लगाने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश में बिजली की दरों में कटौती करने का फैसला विपक्ष के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन सियासत में तो एक तीर अगर एक ओर से चलता है तो उसकी काट और जवाब भी तैयार ही रहते हैं। यही तो लोकतंत्र है। खंबों पर लटके तारों में करंट भले ही जितना कम या ज्यादा आता हो लेकिन सियासी झटकों का दौर शुरू हो चुका है।
श्रीदेवी का फिल्मी गीत तो आप सभी ने सुना ही होगा- बिजली गिराने मैं आई, मैं हूं हवा-हवाई.
जी हां....बिलकुल गिरेगी बिजली, इसीलिए विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने इतनी बड़ी घोषणा की है। टाइमिंग शानदार और घोषणा ऐसी कि विपक्ष के लिए बड़े झटके जैसी। प्रदेश में चुनाव सिर पर हों और बिजली का मुद्दा ना उठे तो चुनाव कुछ अधूरे से लगते हैं। वैसे मुद्दे उठाने की परंपरा विपक्ष निभाता है लेकिन इस बार मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने पहला पंच जड़ दिया है। वो भी ऐसा मानो विपक्ष को इसे मुद्दे पर नॉक ही कर देना चाहते हों। सीएम ने चार साल में हरियाणा के वोटर्स के करंट को महसूस कर लिया है और बिजली उपभोगताओं को बड़ी राहत दी है।
सरकार ने करीब 46 फीसदी की कटौती बिजली की दरों में की है जिसका लाभ हर महीने 500 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को होगा। दूसरी बड़ी राहत यह दी है कि अब बिजली का बिल हर महीने आया करेगा। ताकि कम यूनिटों का लाभ जनता को मिल सके।
अगर पूरी घोषणा को ध्यान से देखें तो बिजली के मीटरों के रूप में वोट का कनैक्शन उन लोगों के साथ बनाने की कोशिश की गई है जो ढाणियों में रहते हैं। अब लाल डोरे के एक किलोमीटर के दायरे की ढाणियों में बीजेपी के वोट की लाइट जलाने कोशिश की गई है।

अब भई ये तो विपक्ष के लिए वाकई ही 440 वॉल्ट का झटका है। 2019 में बिजली के नंगे तारों पर चलना पड़ेगा ये तो समझ आ गया है। इसलिए सवाल खड़ा कर दिया कि मुख्यमंत्री कैसे बिजली की दरें घटा सकते हैं ये काम तो उनका है ही नहीं। हालांकि सीएम ने विपक्ष को जवाब देते हुए कहा कि बिजली के रेट नहीं सरकार सब्सिडी दे सकती है।
अब अपनी ही पार्टी में झटके झेल रहे नेताओं को भी ये झटका कुछ जोर से ही लगा है। अब देखिए साहब एक बड़ा मुद्दा और ऐसे हाथ से फिसल रहा हो तो पुराने दिन याद ही जाते हैं। 1600 करोड़ के बिल माफ भी याद आ गये।
हरियाणा में बिजली के रेट में कटौती करके हरियाणा की सियासत में मनोहर सरकार ने मास्टर स्ट्रोक लगाया है। साफ है सूबे के मुखिया लोगों के करंट को समझ चुके हैं और 2019 में पार्टी को पॉवर कट से बचाने में जुटे हैं। हरियाणा में बिजली हर बार चुनावी मुद्दा रही है और तमाम राजनीतिक दल जनता को लुभाने के लिए पॉवर प्लान बनाते हैं। पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई बीजेपी सरकार बिजली कंपनियों के घाटे और पूर्व की सरकारों की बिजली पर रही रणनीति को कोसती रही है। इतना ही नहीं सूबे के सीएम खुद ये दावा करते थे बिजली की दरों में कटौती नहीं की जा सकती चूंकि घाटा पहले ही ज्यादा है,  लेकिन अब सीएम के सुर 2019 को देखकर बदल गए हैं।
 


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