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नया हरियाणा

बुधवार, 21 नवंबर 2018

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भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अभय सिंह चौटाला के दादागिरी भरे बयान

सरकार को घेरने के बजाय विपक्ष आपस में ही गुथमगुथ्था हो रहा है.

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18 सितंबर 2018

नया हरियाणा

सरकार को घेरने के बजाय विपक्ष आपस में ही गुथमगुथ्था हो रहा है. जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिलता हुआ नजर आ रहा है. मीडिया विश्लेषकों और राजनीति के जानकार इस तमाशे के बीच भाजपा की बढ़त को साफ देख रहे हैं. 

हाल के दिनों में हरियाणा में विपक्ष के दो बड़े नेताओं ने अपनी दादागिरी भरी भाषा से सत्ता पक्ष को फायदा पहुंचा दिया। कहां तो विपक्ष सरकार पर दबाव बनाता है कि सरकार लोकहित में अधिक से अधिक कार्य कर सके. वहीं हरियाणा में विपक्ष आपस में ही लड़ने में मस्त नजर आ रहा है. विधानसभा में तो विपक्ष अलग-थलग दिखा ही विधानसभा से बाहर आ कर भी सरकार को मुद्दों पर घेरने के बजाय एक-दूसरे पर छींटाकसी कसने में व्यस्त रहा.
पूर्व मुख्यमंत्री ने तो सारी सीमाएं लांघते हुए असंवेदनशीलता दिखाते हुए जबरदस्ती पीडित लड़की से मिलने की कोशिश की. पीडिता के परिजनों ने नेताओं की आवाजाही से परेशान होकर डिप्रेशन का हवाला देकर गेट पर कुंडी तक लगा दी. अंदर जाते वक्त पूर्व सीएम हुड्डा ने सीएमओ डॉ. कृष्ण और एसएमओ डॉ. सुदर्शन पर भड़क गए. हुड्डा ने कहा कि नौकरी करनी सिखा दूंगा और सीएमओ को गेट आउट बोला. सीएमओ तुरंत बाहर निकल गए.
क्या एक पूर्व मुख्यमंत्री को इस तरह का बर्ताव शोभा देता है? क्या सरकारी कर्मचारियों के प्रति इस तरह का रवैया लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक नहीं है? नेताओं के इस तरह बर्ताव के कारण ही डॉक्टर सरकारी डॉक्टर बनने में हिचकते रहे हैं, क्योंकि उन्हें इस तरह के अपमान का सामना करना पड़ता है. ऐसे में नागरिकों की जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे नेताओं से सवाल पूछे जाएं कि आखिर उनका बर्ताव सरकारी कर्मचारियों के प्रति इस तरह का क्यों है?

पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ के नेताओं ने गैंगरेप जैसे गंभीर मुद्दों को भी राजनीति का अखाड़ा बना लिया है. जिसमें पार्टी वर्कर भी नेताओं के हाथ की कठपुतली बनकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं. जो कि समाज के लिए बेहद नुकसानदायक स्थिति है.
दूसरी तरफ विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला के बयान भी किसी तरह से लोकतंत्र के लिए सेहतमंद नजर नहीं आ रहे हैं. उन्होंने तो विधानसभा में जूता निकालने वाले प्रकरण का प्रचार-प्रसार करना शुरू कर दिया है और दो कदम आगे बढ़ते हुए गोली मारने तक की बात कह दी थी. हालांकि उन्होंने यह बात बचाव के तौर पर कही थी. पर ऐसे  समय में जब मीडिया बातों को तूल देने में महारत हासिल कर चुका हो, तब संभल कर बयानबाजी करनी चाहिए.
गौरतलब है कि हरियाणा विधानसभा में जूता प्रकरण अब इनेलो-बसपा की सभाओं में भी चर्चा का विषय बन गया है। विधानसभा में विधायक करण दलाल व प्रतिपक्ष नेता अभय चौटाला के बीच जूता दिखाने के मामले में अभय चौटाला कार्यकर्ताओं के बीच जाकर फीडबैक ले रहे हैं. इसका उदाहरण इनेलो-बसपा के चरखी दादरी में कार्यकत्र्ता मीटिंग में देखने को मिला। कार्यकत्र्ता मीटिंग में अभय चौटाला ने कार्यकर्ताओं से पूछा कि जब स्व. देवीलाल के बारे में कोई अभद्र टिप्पणी करें तो क्या जूता दिखाना सहीं था? कार्यकर्ताओं ने भी तालियां बजाकर अभय चौटाला का समर्थन किया और कुछ ने तो इतना तक बोला कि दिखाने की बजाए मारे देते तो सही होता। वहीं अभय चौटाला ने दादरी में सोमवार को फिर से पिछले काफी वर्षों से अजय चौटाला के समर्थक को हडका दिया.
 


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