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नया हरियाणा

शुक्रवार, 21 सितंबर 2018

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फरीदाबाद की राजनीतिक बिसात पर शुरू हुई सियासी जंग

किसकी चाल सधेगी और किसकी पार्टी में चलेगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा.

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12 सितंबर 2018

प्रदीप डबास

अपनों को अपनों से खतरा, अपने दिखा सकते हैं अपनों को आंखें, ये फरीदाबाद है साहब यहां क्या अपने-अपने नहीं होते हैं। राजनीति की बात करें तो शायद बिलकुल नहीं। केंद्रीय राज्य मंत्री और प्रदेश में कैबिनेट मंत्री का प्रेम तो धीरे-धीरे उजागर हो ही रहा था अब सीन में एक किरदार और आने वाला है। या फिर यूं कहिए कि भडाना फैक्टर की एंट्री। मतलब बीजेपी की फरीदाबाद राजनीति में सीधे-सीधे शह और मात का खेल चलेगा। मतलब यहां जंग होने वाली है।
  फरीदाबाद बीजेपी के हर बड़े नेता की जंग है। यहां ऐसा लगने लगा है कि 2019 के संग्राम से पहले शायद एक जंग एक-दूसरे को पटकनी देने के लिए लड़ी जानी है। मतलब जिले में पार्टी के तमाम बड़े नेता शायद एक-दूसरे को सीधी मात देने में कोई कसर नहीं छोडना चाहते हैं। केंद्र में राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर और सूबे में पार्टी के हैवीवेट कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के बीच जितनी मोहबत है वो सबके सामने है ही। अब यहां एक फैक्टर और दिखने लगा है और वो है भडाना फैक्टर।
अवतार भडाना फिलहाल यूपी में मीरापुर से बीजेपी के विधायक हैं। लेकिन उनका फरीदाबाद प्रेम एक बार फिर से उमड़ आया है। भडाना एक बार फिर से फरीदाबाद लोकसभा सीट से सांसद के रूप में अवतार लेना चाहते हैं। उनकी इच्छा जाहिर करने का तरीका बताता है कि इस बार इरादे काफी बुलंद हैं।
जरा समीकरण समझिए....अवतार भडाना 2014 में फरीदाबाद लोकसभा चुनावों में चुनावों में कांग्रेस की टिकट पर बीजेपी के कृष्णपाल गुर्जर के सामने खड़े थे। मोदी लहर थी तो हार कुछ ज्यादा ही करारी हो गई। भडाना साहब को भी समझ आ गया कि अभी यहां दाल गलाने में थोड़ी देर लगेगी तो हाथ का साथ छोड़ थाम लिया कमल....और भडाना का ये कमल खिला यूपी विधानसभा चुनाव में मीरापुर सीट से, लेकिन साहब अपना घर तो फिर अपना ही होता है ना। यहां रौब है....टौर है....और भडाना साहब कह भी रहे हैं कि उनके समर्थक घर वापस बुलाना भी चाहते हैं। 
अब भडाना पर भाजपा दांव लगाती है या नहीं ये तो पार्टी को तय करना है लेकिन इतना तय है कि अगर भडाना फरीदाबाद आते हैं तो यहां के समीकरण फिर से सेट होंगे। अभी तक फरीदाबाद में भाजपा के दो गुट माने जाते हैं। लेकिन एबी फैक्टर आने के बाद ये खाने फरीदाबाद में बढेंगे।
ऐसे में कुछ सवाल उठना लाजिमी हैं-
क्या हो सकता भडाना फैक्टर का असर?
क्या कृष्णपाल गुर्जर और विपुल गोयल में बढ़ेंगी नजदीकियां?
अगर विपुल गोयल भडाना के साथ आए तो क्या कृष्णपाल गुर्जर की बढ़ सकती हैं मुश्किलें?
क्या विपुल गोयल भी लोकसभा के लिए कस रहे हैं कमर? 
जब अटकलों का बाजार गर्म हो तो नेताओं का बीपी ना बढ़े ऐसा कैसे हो सकता है। और जब बात सीट पर आन खड़ी हुई हो तो कोई क्यों नहीं बोलेगा भाई। तो लो जी कृष्णपाल जी का एक बयान आ गया अखबारों में। वे कहते हैं कि अनुशासनहीनता में पार्टी ने बड़े-बड़े नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया है। भाजपा में टिकट पार्टी का संसदीय बोर्ड जनता की आवाज पर तय करता है। अभी अवतार भड़ाना को भाजपा की रीति-नीति के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। 
अरे बात तो भडाना फैक्टर की हो रही है तो फिर एक और भडाना को कैसे भुलाया जा सकता है और ये हैं अवातर के बड़े भाई करतार। करतार की इच्छा भी तो फरीदाबाद से ही लोकसभा पहुंचने की है। वो तीन बार से यूपी में विधायक हैं और एक बार हरियाणा में मंत्री भी रह चुके हैं। फिलहाल अजित सिंह की पार्टी में हैं और पार्टी का चुनावी चिन्ह हैंडपंप फरीदाबाद में गाड़ना चाहते हैं। वो बात अलग है कि कहीं उन्हीं का अनुज गदर फिल्म का सन्नी दयोल ना बन जाए।
एक बात और बता दें आप को करतार के बेटे मनमोहन भड़ाना कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला के नजदीक समझे जाते हैं और सूत्र कहते हैं कि मनमोहन को इस बार पानीपत जिले की समालखा सीट से टिकट दिलवाने की पूरी कोशिश उनके पिता कर रहे हैं, क्योंकि करतार खुद यहां से दो बार विधायक रह चुके हैं। मतलब वक्त फिर आ गया है वही गीत सुनने का, क्योंकि ये ही होने जा रहा है।...जिंदगी हर कदम एक नई जंग है...या यूं कहें कि राजनीति हर कदम पर एक नई जंग ही है। 
 


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