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नया हरियाणा

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018

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चिंतन और मंथन का हरियाणा सरकार की कार्यशैली पर क्या प्रभाव पड़ता है?

देखना यह होगा कि हरियाणा भाजपा चिंतन और मंथन को जमीनी धरातल पर उतार पाती है या नहीं.

Chief Minister Manohar Lal, Agriculture Minister Om Prakash Dhankar, Finance Minister Capt Abhimanyu, Health and Sports Minister Anil Vij,, naya haryana, नया हरियाणा

4 सितंबर 2018

प्रदीप डबास

सूबे में बीजेपी नेता एक बार फिर मंथन के लिए बैठेंगे. 2019 की रणनीति को लेकर चर्चा होगी. पांच सितंबर को चंडीगढ़ या उसके आप-पास पार्टी नेता विचार करेंगे कि किस तरह 2014 का इतिहास अगले साल फिर से दोहराया जाए. लेकिन ये भी सच है कि जब मंथन होता है तो अमृत के साथ साथ विष भी निकलता है. अब यह भाजपा सरकार के मंथन करने पर निर्भर करता है कि वह केवल अमृत पर ही फोकस करती है अपने विष को भी गंभीरता से लेती है। वैसे भी अगर मंथन के बाद उसे अपनी रणनीति का हिस्सा बनाते हुए अमलीजामा नहीं पहनाया जाता है तो मंथन बौद्धिक जुगाली बनकर रह जाता है।
बीजेपी में चिंतन और मंथन के दौर चलते रहते हैं लेकिन अब जिस तरह से बैठकों के सिलसिले तेज हुए हैं और होते जा रहे हैं उससे साफ है कि पार्टी 2019 के लिए पूरी तरह तैयारी कर लेना चाहती है. आने वाली पांच तारीख को प्रदेश बीजेपी के तमाम बड़े नेता और कार्यकर्ता एक साथ बैठने जा रहे हैं. 
कार्यकर्ताओं और नेताओं से फीडबैक ली जानी है, वैसे सियासी गलियारों में सवाल ये भी उठ रहे हैं कि क्या सिर्फ फीड बैक और रणनीति तक ही सीमित रहेगी ये बैठक या फिर जितने बड़े कार्यकर्ताओं को बुलाया जा रहा है उन्हें कुछ आश्वासन देकर एक मुस्कुराहट के साथ वापस भेजा जाएगा. क्योंकि पार्टी अब किसी भी सूरत में रिस्क लेने के मूड में नहीं है...मतलब कोशिश सबके भरपूर इस्तेमाल पर ध्यान देने की होगी.
भीतर की बात ये हैं सूबे में पार्टी के कई विधायक और वरिष्ठ कार्यकर्ता ऐसे हैं जिन्हें उम्मीद थी कि सत्ता में आए तो उन्हें उनका सम्मान जरूर मिलेगा. चार साल के करीब बीत जाने के बाद जहां बैठकों का दौर तेज हो रहा है तो ऐसे नेताओं की इच्छाएं भी प्रबल हो रही हैं. मतलब साफ है कि बैठक में इस तरह मुद्दे भी जरूर उठेंगे. हालांकि बीजेपी के सूबे में मुखिया खुद कह रहे हैं कि ये उस प्रकार का मंथन शिविर नहीं होगा जिस प्रकार की कल्पना की जा रही है. मतलब साफ कि कुछ तो सोचा ही जा रहा है ना चाहे वो कार्यकर्ता या नेता हो या फिर मीडिया.
वैसे जिस तरह 2019 सिर पर आन खड़ा हुआ तो बीजेपी अपने तमाम विधायकों का भरपूर इस्तेमाल करना चाहती है. पार्टी की कोशिश है कि तमाम विधायकों को कुछ ना कुछ देकर खुश रखा जाए. ऐसे में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व और जाति की अगुवाई भी मायने रखेगी। ये पूरी तरह संभव है कि इस बैठक में ये अडजेस्टमेंट भी रणनीति का एक हिस्सा रहे.
इन बातों की चर्चा करना इस लिए जरूर हो गया है कि आने वाले समय में छह जिलों में नगर निगम चुनाव होने जा रहे हैं. ऐसे में शहरी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को बांधे रखना जरूरी है. जिसे भाजपा का कोर वोटर कहा जाता है या यूं कहे माना जाता है.
मुख्यमंत्री मनोहर लाल हाल ही में नई दिल्ली में मिशन-2019 को लेकर हुई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में आलाकमान को प्रदेश सरकार की उपलब्धियां और चुनौतियां गिना कर लौटे हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इस दौरान आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर पार्टी की स्थिति को लेकर भी मुख्यमंत्री से लंबी गुफ्तगू की। 5 सितंबर की बैठक में मुख्यमंत्री संगठन के सभी पदाधिकारियों को केंद्र से मिले निर्देशों की जानकारी भी दी जाएगी.
अब देखने वाली बात ये होगी कि इस चिंतन और मंथन का हरियाणा सरकार की कार्यशैली पर क्या प्रभाव पड़ता है? क्या मनोहर सरकार प्रधानमंत्री मोदी की रणनीति अनुसार 4 साल सुशासन और 1 साल चुनावी राजनीति के तहत कार्य करेगी? या मनोहर सरकार अपनी इसी शैली पर चलती रहेगी, जिसे ढुलमुल सरकार का नाम दिया जाता रहा है.
 


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