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नया हरियाणा

शुक्रवार, 21 सितंबर 2018

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साहित्य विरोधी नियमों को लेकर सीएम को लिखा पत्र

हरियाणा साहित्य अकादमी का साहित्यकार विरोधी रूख साफ दिखता है.

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29 अगस्त 2018

नया हरियाणा

 कहते हैं मनमर्जी की भी अपनी एक सीमा होती है। अनुभव हीनता के कारण लिए गए फैसले कभी तुगलकी फरमान कहलाते हैं तो कभी घर की बही। अपनी अदभुत कार्यशैली एवं निदेशक के व्यवहार को लेकर समय-समय पर चर्चा में रहने वाली हरियाणा साहित्य अकादमी ने इस बार जो कारनामा किया है उसे न केवल प्रदेशभर में अपितू देश भर के साहित्यकारों में एक नई बहस को छेड़ दिया है। वर्ष 2018 के लिए हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा दिए जाने वाले अवार्डों को लेकर जो नियमावली जारी की गई है। उससे सभी साहित्यकार न केवल सकते में हैं बल्कि रोष से भर गए हैं।

साहित्य अकादमी ने अपने 12 अवार्ड देने के मामले में नियम जारी किए हैं कि बाबु बालमुकुंद गुप्त सम्मान, लाला देशबंधु गुप्त सम्मान, पं. लख्मिचंद सम्मान, जनकवि मेहरसिंह सम्मान, हरियाणा गौरव सम्मान, आदित्य अल्हड़ हास्य सम्मान एवं श्रेष्ठ महिला रचनाकार सम्मान इत्यादि के लिए साहित्यकार की 45 वर्ष आयु होनी आवश्यक है। इससे पहले कोई साहित्यकार उक्त सम्मान के लिए योग्य नहीं है। वहीं आजीवन साहित्य साधना सम्मान, महाकवि सुरदास आजीवन साहित्य साधना सम्मान व पंडित माधव मिश्र सम्मान के लिए कम से कम 65 वर्ष की आयु होना निर्धारित किया है। इसके अलावा स्वामी विवेकानंद स्वर्ण जयंती युवा लेखक सम्मान व पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वर्ण जयंती युवा लेखक सम्मान के लिए अकादमी ने अधिकतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की है। यही नहीं अकादमी ने तमाम सम्मानों के लिए अन्य राज्यों के साहित्यकारों की घुसपैठ के रास्ते भी खोल दिए हैं।

अकादमी ने अपनी नियमावली में कहा है कि हरियाणा साहित्य अकादमी से किसी भी प्रकार के अवार्ड के लिए हरियाणा राज्य का निवासी होना जरूरी नहीं है। जबकि अन्य राज्यों की अकादमियों ने आज तक हरियाणा के साहित्यकारों खासकर हरियाणवी लेखकों को कभी न ही प्रोत्साहित किया और न ही अपनी अकादमियों में घुसपैठ होने दी है। इस तमाम घटनाक्रम को लेकर अकादमी के नियमों से क्षुब्ध हरियाणवी रेडिय़ो जंक्शन के निर्देशक व कवि वी.एम बेचैन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर उक्त तमाम नियमों को खारिज कर नए नियम निर्धारित करने की मांग की है।

सीएम को लिखे पत्र में जहां उम्र को प्रतिभा के साथ जोडऩे जैसे बचकाने नियमों की शिकायत की गई है वहीं पुस्तक प्रकाशन अनुदान योजना में अकादमी द्वारा पुस्तक के पृष्ठों की संख्या बढ़ा देने की भी शिकायत की गई है। वी.एम बेचैन ने बताया कि हरियाणा के शेक्सपियर कहे जाने वाले पं. लख्मीचंद का देहांत महज 42 वर्ष की उम्र में हो गया था और हरियाणा का गुगल ब्वॉय कोटिल्य अभी महज 15 वर्ष के हैं लेकिन इनकी प्रतिभाओं को साहित्य अकादमी के नियमों ने नकार दिया है। साहित्य विरोधी नियमों के खिलाफ आज प्रदेश के साहित्यकारों में रोष भरा पड़ा है। 
 


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