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बुधवार, 19 दिसंबर 2018

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राजनीतिक पोस्टमार्टम : सूबे में क्या है कांग्रेस का सियासी चेहरा

जानिए कौन सा कांग्रेसी नेता कहां गोटियां फीट करने लगा है.

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24 अगस्त 2018

वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक प्रदीप डबास

बात कांग्रेस की हो रही हो और जिक्र धड़ेबाजी और खेमेबाजी का न हो क्या ऐसा हो सकता है. यहां हर चेहरा खुद को या तो प्रदेश अध्यक्ष या फिर मुख्यमंत्री पद के दावेदार से कम नहीं मानता. कोई खुद बनना चाहता है तो कोई किसी को बनवाना चाहता है. ऐसे में भले ही मौजूदा अध्यक्ष या यूं कहें कि पार्टी का चाहे जो होता रहे. फिल्मी अंदाज में कहें तो सत्ते पर सत्ता हो या अट्ठे पर अट्ठा कोई फर्क नहीं अलबत्ता.
इस गाने के बोल की तरह ही कुछ हो रहा है सूबे की कांग्रेस में. कोई एक चाल चलता है दूसरे के पत्ते खट से सामने आते हैं. 2019 की जंग सिर पर आन खड़ी हुई है. सियासत की चौसर पर धर्म और जाति से लेकर हर तरह के मोहरों को फिट बैठाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं. सूबे की पोलिटिकल गैलरीज में हलचल इतनी तेज हो चुकी है कि कौन कब कहां से निकलकर कहां जा रहा है इन सब पर पैनी निगाह रखने की जरूरत बढ़ती जा रही है.
चांद मोहम्मद को तो पहचानते हैं ना आप.....फिज़ा के प्यार में चंद्र से चांद मोहम्मद बन गये थे, लेकिन अब फिज़ा तो है नहीं लेकिन सियासी फिजाओं में जनाब फिर से चंद्रमोहन बनकर सक्रिय हो गये हैं. इसी हफ्ते भजनलाल परिवार के ये चंद्रमोहन दिल्ली में थे. दिल्ली में इन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकत की थी और आज खबरें मिली हैं कि जर्मनी (बर्लिन) में इनके बेटे सिद्धार्थ ने राहुल गांधी से मुलाकात की है.
लेकिन जरा ठहरिये.....मुलाकात का मकसद आपको बताएं उससे पहले कुछ थोड़ा पीछे चलते हैं. आइए आदमपुर लिए चलते हैं आपको. यहां पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अपने एक समर्थक के हक में जनसभा को संबोधित कर रहे थे. और सुन लीजिए क्या कहा था कांग्रेस के प्रदेश में मुखिया अशोक तंवर ने. उन्होंने कहा कि टिकट सिर्फ काम करने वालों मिलेगी. मतलब साफ है कि पहले टिकट बिना काम किए पैसे के दम पर भी मिलती रही है.
अब मामला आदमपुर का हो और प्रदेश अध्यक्ष का इशारा साफ कुछ संकेत देता है. फिर वही करना था जो चंद्रमोहन करने में लगे हुए हैं. चर्चाएं हैं उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात कर अशोक तंवर को बदलने की वकालत की है. चंद्रमोहन ने अपने भाई कुलदीप बिश्नोई के हाथ में सूबे की कमान सौंपने की वकालत भी कर डाली. बताया जा रहा है इसके लिए कुछ तथ्यात्मक और जातिगत समीकरण भी उन्होंने राहुल गांधी को समझाने की कोशिश की है.
वैसे सूबे में अगर गैर जाट राजनीति कम से कम कांग्रेस और बीजेपी को सूट कर ही रही है. 2014 में बीजेपी ने गैर जाट चेहरे रूप में मनोहरलाल को मुख्यमंत्री के ताज से नवाजा तो कांग्रेस का एक चेहरा अशोक तंवर पूरी ताकत के साथ सामने किया गया. अब पार्टी के अन्य गैर जाट नेताओं की उम्मीदें भी जाग रही हैं.
वैसे कांग्रेस में दावेदारों की कमी नहीं है.....चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में संपत सिंह की जबां पर भी आखिर दिल की बात आ ही गई. मतलब कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के एक ओर दावेदारी. संपत सिंह का कद तो बड़ा है लेकिन उन्हें टिकट कहां से और कैसे मिलेगी ये भी तो पार्टी के मंथन का विषय रहेगा. 
अब जनाब दावेदारी ठोक दी गई हो और कांग्रेस कहीं से टोका टिप्पणी न हो ऐसा कैसे हो सकता है. लीजिए आ गया जवाब पार्टी की विधायक दल की नेता किरण चौधरी का. वो साफ कह रही हैं कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद का चेहरा कोई नहीं है, यहां विधायक तय करते हैं. इसी विधायकों के दम पर पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा अपने सामने अध्यक्ष अशोक तंवर को कुछ नहीं समझते. सुनने में तो यहां तक आता है कि विधायकों के दम पर ही वो हाईकमान तक को ब्लैकमेल करने की कोशिशों में लगे रहते हैं.
अब कहीं भरत मिलाप होते होते रह गया, कहीं भाई को अध्यक्ष बनवाने के लिए लॉबिंग तो, कहीं खुद को मुख्यमंत्री पद के काबिल बता दूसरों के माथे की सिकन बढ़ा देना.....क्या यही है आज के दिन सूबे में कांग्रेस का आसली चेहरा
 


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