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नया हरियाणा

बुधवार, 21 नवंबर 2018

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चंद्रमोहन बिश्नोई और उनके बेटे सिद्धार्थ की राहुल गांधी से मुलाकात किसके लिए है खतरे की घंटी

आखिर कुलदीप से आगे बढ़कर बाप-बेटा राहुल के करीब कैसे पहुंच गए हैं?

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24 अगस्त 2018

नया हरियाणा

पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी भजनलाल के पोते और चंद्रमोहन बिश्नोई के बेटे सिद्धार्थ बिशनोई ने बर्लिन (जर्मनी) में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की है और इस मुलाकात से हरियाणा की सियासत में फुसफुसाहट शुरू हो गई है। खासकर हुड्डा और तंवर खेमे में इसे लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
हरियाणा कांग्रेस में अलग-अलग धड़ों के कारण हाईकमान के लिए यह आफत का भी मामला होता है तो दूसरी तरफ कांग्रेस को इसका फायदा भी मिलता रहा है। कांग्रेस के पास इस तरह कई विकल्प हमेशा खुले रहते हैं। तंवर के साथ पिछले दिनों जो घटनाएं घट रही हैं, उससे लग रहा है कि तंवर अपने अध्यक्ष पद को गंवा सकते हैं। फिर अगला सवाल यही उठता है कि किसे अध्यक्ष पद की कमान सौंपी जाएगी। सूत्रों के हवाले से खबर है कि इसके लिए चहल-कदमी कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा को हाईकमान ने साफ मना कर दिया है। ऐसे में कांग्रेस अगर गैर जाट चेहरे को अध्यक्ष पद देने पर विचार करेगी तो उसके लिए कुलदीप बिश्नोई विकल्प हो सकते हैं।
कांग्रेस के लिए हरियाणा में कई सुविधाओं के साथ दुविधाएं भी कई पैदा हो गई हैं। धड़ों की आपसी सार्वजनिक लड़ाई तो परेशानी का सबब है ही। दूसरी तरफ कांग्रेस अगर हुड्डा को मुख्यमंत्री चेहरा बनाती है तो भाजपा के लिए हरियाणा का चुनाव जाट-गैर जाट मुद्दे पर भुनाना एकदम आसान हो जाएगा, क्योंकि इनेलो और कांग्रेस दोनों में मुख्यमंत्री जाट चेहरे होंगे। कांग्रेस ये कभी नहीं चाहेगी कि भाजपा को जीत थाली में परोस कर दे। दूसरी तरफ हुड्डा को खुड्डे लाइन लगाने का मतलब होगा कि रोहतक और झज्जर के जाटों को इनेलो की तरफ धकेल देना। ऐसे में कन्फ्यूजन वाली स्थिति कांग्रेस बनाए रखने के लिए मजबूर रहेगी।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि चंद्रमोहन हाईकमान में खुद की पैठ मजबूत कर रहे हैं या अपने भाई के हाथ मजबूत कर रहे हैं। कुलदीप बिश्नोई के अध्यक्ष बनने की अफवाहें बीच-बीच में उड़ती रहती हैं।   

सिद्धार्थ ने राहुल गांधी के साथ हरियाणा की राजनीतिक हालातों पर चर्चा की। पिछले दिनों चंद्रमोहन बिश्नोई ने भी दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इन दोनों मुलाकातों को सामान्य शिष्टाचार वाली मुलाकातें तो बिल्कुल नहीं माना जा सकता। हालांकि बर्लिन में राहुल के साथ हरियाणा कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी भी मौजूद थी।
गौर करने वाली बात यह है कि आखिर सिद्धार्थ और चंद्रमोहन की राहुल से नजदीकी किस पर पड़ सकती है भारी? जवाब भले ही स्पष्ट न हों पर कई नाम जेहन में उभर ही जाते हैं जैसे कुलदीप बिश्नोई पर भारी पड़ सकती है, अशोक तंवर पर भारी पड़ सकती है, हुड्डा पर भारी पड़ सकती है या किसी ओर पर?
आखिर कुलदीप से आगे बढ़कर बाप-बेटा राहुल के करीब कैसे पहुंच गए हैं? कुलदीप बिश्नोई कब तक प्रियंका गांधी के साथ अपने नजदीकी रिश्तों का लाभ उठाते रहेंगे? ऐसे में कुलदीप बिश्नोई क्या नया कदम उठाएंगे? इन चंद सवालों के जवाब जब तक मिल नहीं जाते तब तक हम भी किसी नतीजे पर पहुंचने की जल्दबाजी से किनारे करते हुए हरियाणा की राजनीति पर पैनी नजर बनाए रखेंगे।
 


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