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रविवार, 19 अगस्त 2018

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जसिया रैली: धरे रह गये दावे, रैली फ्लॉप, आम लोगों ने बनाकर रखी दूरी

अब यह आप पर है कि आप रैली को किस तरफ से देखते हैं और क्यों देखते हैं?

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27 नवंबर 2017

नया हरियाणा

जसिया में हुई रैली का समर्थन और विरोध दोनों काफी लंबे अरसे से हरियाणा में लगातार जारी है. कल हुई रैली के समर्थक उसे सफल बता रहे हैं और विरोध करने वाले असफल. अगर दावों से परे हटकर संख्या के आधार पर सफलता-असफलता देखते हैं तो यह रैली बुरी तरह फ्लॉप रही है, क्योंकि हरियाणा के दो बड़े नेता अभय सिंह चौटाला और चौ. बीरेंद्र सिंह दोनों इसमें शामिल हुए थे. इस आधार पर आंकलन करे तो रैली को असफल ही माना जाएगा. क्योंकि हजारों की संख्या का दावा रामपाल भक्त भी कर रहे हैं और रैली का आयोजन करने वाले यशपाल गुट के भी कर रहे हैं. अब भीड़ किसके लिए कितनी आई, इसका ठीक अनुमान लगाना मुश्किल है.
सोशल मीडिया पर रैली की असफलता का जश्न ज्यादा दिखा, बजाय सफलता के. दूसरी तरफ इनैलो समर्थकों में मायूसी और खुशी दोनों देखने को मिली. अगर रैली में आई भीड़ अभय सिंह की मानी जाये तो रैली आयोजन करने वाले यशपाल गुट को जाट समाज ने फिर पूरी तरह नकार दिया है. यदि रैली में आयोजकों के कारण भीड़ जुटी थी तो फिर अभय सिंह के राजनैतिक भविष्य पर सवाल खड़े होते हैं. बीरेंद्र सिंह के पास पहले ही कम जनाधार की खबरें आती रही हैं. इसीलिए उनकी तरफ से कोई दावा भी पेश नहीं किया गया. दरअसल भीड़ पर दावा सबसे ज्यादा रामपाल के समर्थकों और अभय सिंह के समर्थकों की तरफ से ही किया जा रहा है. जसिया रैली में हजारों की तादाद में सन्त रामपाल महाराज के समर्थक भी पहुंचे. वीडियो और उनसे हुई बातचीत से यह साफ पता चल रहा था कि वो दूसरे राज्यों से आए हुए थे और उन्हें झूठ बोलकर बुलाया गया था.

रोहताश हुड्डा की फेसबुक पर की गई टीप से भी यही लगता है कि आयोजकों के अनुसार भीड़ अभय सिंह के कारण आई.

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रोहतक सरपंच एसोसिएशन और जिला पार्षदों  ने आरोप लगाते हुए कहा कि -"यशपाल मलिक के इशारे पर प्रशासन के द्वारा वहां पर पर मौजूद जेल से आये बच्चों, बुजुर्गों व सरपंच साथियों को जो यशपाल मलिक के मुद्दों से भटकने व समाज के पैसों को गलत इस्तेमाल के खिलाफ आवाज़ उठाने का काम कर रहे थें, उन्हें गिरफ्तार करवाया ताकि रैली का विरोध न हों।" जेल से बाहर आने के बाद सरपंच सुमित मकडौली ने कहा कि उनका संघर्ष चलता रहेगा, जब तक जाट समाज को न्याय नहीं मिल जाता.

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फेसबुक पर अभय चौटाला के समर्थक ने लिखा कि-"चौधरी अभय सिंह चौटाला जी ने आज जसिया रैली में पहुंच कर यह साबित कर दिया कि उनकी रगों में चौधरी देवीलाल जी व चौधरी ओम प्रकाश चौटाला जी का खून है जब उन्होंने अपना भाषण दिया तो लोगों का जोश देखने लायक था अभय सिंह जी ने अपनी नेक कमाई से एक करोड़ की राशि दान में दी ...we proud of you.. thanks" उनके बयान को गौर से पढ़ा जाए तो यह सवाल निकलता है कि क्या उन्होंने इस बहाने दुष्यंत चौटाला पर भी निशाना साधा है, क्योंकि खून तो वो भी इसी परिवार का है.

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फेसबुक पर संगीता दहिया ने कल रात लाइव वीडियो में रैली को असफल करने के लिए समाज के सभी जागरूक लोगों का धन्यवाद दिया और रैली में शामिल हुए नेताओं पर कुछ सवाल भी दागे. जिसके कारण उन पर इनैलो समर्थकों ने टीका-टिप्पणियां करनी शुरू की दी. जिसका जवाब देते हुए उन्होंने एक स्टेट्स भी लिखा है और संगीता दहिया ने रैली पर लिखा है कि- 

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यशपाल गुट से निकले नेताओं ने मीडिया में इस तरह के बयान देकर विरोध दर्ज किया-
"यशपाल मलिक जाटों को दीमक की तरह खा रहा है, जसिया रैली को लेकर दो फाड़ हुए जाट नेता, मलिक को दी ''जयचंद'' की उपाधि
हरियाणा में जाट नेताओं के सिरमौर बने हुए यशपाल मलिक के खिलाफ जाट नेताओं के विरोधी सुर अब उठने लगे हैं। ये सुर वो जाट नेता उठा रहे हैं जो एक समय मलिक के सबसे करीबी माने जाते थे। अब वो ही मलिक को बाहरी बताकर हरियाणा से बाहर भागने की बात कह रहे हैं। दरअसल सोनीपत पीडब्लूडी रेस्ट हाउस में आज यशपाल मलिक के सबसे करीबी माने जाने वाले जाट नेता राजेश दहिया, मूलचंद दहिया और राजेश छिक्कारा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मलिक को जयचंद की उपाधि दी। जाट नेता राजेश दहिया और मूलचंद दहिया ने कहा कि यशपाल मलिक जाटों को दीमक की तरह खा रहा है और जाटों को नपुंसक बना रहा है। वे 6 नवम्बर को रोहतक में एक मीटिंग करने जा रहे हैं। जिसमें वो 26 नवम्बर की रैली जोकि जसिया में यशपाल मलिक करने जा रहा है उसका विरोध करेंगे और उसे बाहर का रास्ता दिखाएंगे।"

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अब यह आप पर हैं कि आप रैली को किस तरफ से देखते हैं और क्यों देखते हैं?
 


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