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नया हरियाणा

मंगलवार, 13 नवंबर 2018

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कांग्रेस ने ताबूत घोटाले में बदनाम किया था अटल बिहारी वाजपेयी को

वर्तमान समय में मोदी सरकार पर रोफेल खरीद-फरोख्त घोटाले के आरोप लगाए जा रहे हैं.

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16 अगस्त 2018

नया हरियाणा

आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत काफी नाजुक चल रही है। अटल बिहारी जब प्रधानमंत्री थे, तब पाकिस्तान के साथ कारगिल युद्ध में भारत ने विजय हासिल की थी, परंतु कांग्रेस ने एक ईमानदार नेता को बदनाम करने के लिए उन पर ताबूत खरीद-फरोख्त में घोटाले के आरोप लगाए थे। हालांकि आरोप बाद में फर्जी साबित हुए थे। परंतु कांग्रेस जिस बदनामी के सहारे सत्ता हासिल करना चाहती वो उसे हासिल हो गई थी। ऐसा ही आरोप कांग्रेस अब मोदी सरकार पर रोफेल खरीद में लगा रही है। क्या यह महज संयोग है कि कांग्रेस भाजपा नेताओं के खिलाफ हथियारों की खऱीद-फरोख्त के आरोप लगाकर सत्ता पाने का खेल खेलती है? क्या जनता पिछली गलती इस बार भी करेगी? 

क्या था ताबूत घोटाले का सच

कारगिल युद्ध के दौरान हथियारों और ताबूतों की खरीद में घोटाले के आरोपों से तत्कालीन एनडीए सरकार को बरी कर दिया गया था। करीब सोहल साल बाद इस मामले में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने किसी को भी दोषी न मानते हुए इस मामले को बंद करने के निर्देश दे दिए। 
गौरतलब है कि कारगिल युद्ध के दौरान मिसाइल, हथियारों और शहीद जवानों के लिए ताबूतों की खरीद-फरोख्त में व्यापक घोटाले की बात सामने आई थी, जिसके चलते तत्कालीन एनडीए सरकार की काफी किरकिरी भी हुई थी। 

जस्टिस टी. एस. ठाकुर और वी. गोपाल गौडा की खंडपीठ ने सीबीआई की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया, जिसमें कहा गया है कि 24 हजार करोड़ रुपयों के घोटाले का आरोप लगाने वाली एक जनहित याचिका के दावों की जांच-पड़ताल के बाद इस मामले में न तो किसी भी तरह की अनियमितता सामने आई है और न ही किसी को भी दोषी पाया गया है। 

सर्वोच्च न्यायालय साल 2004 से ही इस केस की मॉनिटरिंग कर रहा था। इस दौरान केंद्र और सीबीआई ने यह भी दलील रखी कि इस केस में सभी आरोपियों को ट्रायल कोर्ट द्वारा क्लीन चिट दी जा चुकी है। 

ऐडवोकेट आर. बाला सुब्रमणियम ने केंद्र का पक्ष रखते हुए कहा कि 'याचिका में आरोप लगाया गया था कि ऐल्युमिनम ताबूत, हथियार और स्नो सूट्स की खरीद-फरोख्त में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है। लेकिन सीबीआई ने अपनी जांच में ऐसी कोई अनियमितता नहीं पाई और ट्रायल कोर्ट भी क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर चुका है।'


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