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नया हरियाणा

रविवार, 25 अगस्त 2019

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जैविक महाकुंभ : जहरित क्रांति से जैविक खेती की ओर लौटते किसान

एक तरफ भारतीय छोटे किसान जैविक खेती और किसान कंपनियों के माध्यम से किसानी को मुनाफे का काम बनाने के लिए प्रयासरत हैं, तो दूसरी तरफ मल्टीनेशनल कंपनियां भी जैविक पदार्थों के क्षेत्र में कूद रही हैं. तमाम चिंताओं और शंकाओं के बावजूद जैविक अर्थात् भारतीय पारंपरिक खेती के दिन लौटने लगे हैं.

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25 नवंबर 2017



नया हरियाणा

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने ग्रेटर नोएडा में 9 से 11 तक चलने वाले जैविक कृषि विश्व कुंभ 2017 का उद्घाटन किया था। यह आयोजन ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में आयोजित किया गया था। इस आयोजन में विश्व के 110 देशों के 1400 प्रतिनिधि और 2000 भारतीय प्रतिनिधि शामिल हुए थे। कृषि विश्व कुंभ का आयोजन तीन साल में एक बार दुनिया के किसी देश में होता है। इस बार यह भारत में हुआ था। पिछला कुंभ 2014 में इस्तांबुल में हुआ था। आयोजन को इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ ऑर्गेनिक फार्मिंग मूवमेंट्स और ओएफआई मिलकर कर रहा था।
इस आयोजन में भारत के 15 राज्यों से 55 बीज समूहों द्वार 4000 प्रकार के बीजों की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस वर्ष कुंभ का लक्ष्य जैविक भारत से जैविक विश्व की ओर बढऩा है। यह जानने समझने की जरूरत है कि भारत परंपरागत रूप से दुनिया का सबसे बड़ा जैविक कृषि करने वाला देश है। आज के वर्तमान भारत के बहुत बड़े भू-भाग मे परंपरागत ज्ञान के आधार पर जैविक खेती की जाती है। 
कृषि विश्व कुंभ मेला में बरहट के किसानों ने अपनी अमिट छाप छोड़ी। दो दिन तक चलने वाली इस विश्व कुंभ मेला में 110 देशों से आए कृषि मेहमानों को बिहार के कुदरती खेती करने वाले किसानों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। ओडिशा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश आदि राज्यों के किसानों ने भी क़ुदरती खेती के केड़िया मॉडल को अपनाने की बात कही। देश भर से आए किसान केड़िया के देसी बीज पाने के लिए लालायित दिखे और कुम्भ समाप्त होने तक सारे बीज बँट गए। जैविक उत्पादों के लिए स्थानीय व विश्व बाज़ार में काफ़ी अच्छी जगह बनेगी जिससे देशभर के किसानों की आमदनी बढ़ाने को काफ़ी बल मिलेगा। 
भारतीय कृषि परंपरागत रूप से जैविक खेती पर ही आधारित थी, परंतु दूसरे देशों के दबाव में आकर यहां की जैविक खेती को रासायनिक खेती में बदल दिया गया। आजतक हम जिसे हरित क्रांति समझ रहे थे, दरअसल वह ‘जहरित क्रांति’ (जहर वाली/ रासायनिक) थी। एक तरफ भारतीय छोटे किसान जैविक खेती और किसान कंपनियों के माध्यम से किसानी को मुनाफे का काम बनाने के लिए प्रयासरत हैं, तो दूसरी तरफ मल्टीनेशनल कंपनियां भी जैविक पदार्थों के क्षेत्र में कूद रही हैं. तमाम चिंताओं और शंकाओं के बावजूद जैविक अर्थात् भारतीय पारंपरिक खेती के दिन लौटने लगे हैं.

आप सभी के लिए हम ने वहां की कुछ तस्वीरें ली हैं। जिनके माध्यम से आप वहां का मुआयना कर सकते हैं...

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