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नया हरियाणा

बुधवार, 13 दिसंबर 2017

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नहीं रहे जाट समाज से पहले मुख्य न्यायधीश जस्टिस देवी सिंह तेवतिया

जस्टिस तेवतिया ने कहा था कि आज समाज में जितने भी अपराध पनप रहे हैं, वो आपसी भाईचारे की कमी के कारण पनप रहे हैं। यदि आपस में एक-दूसरे के लिए इज्जत होगी तो लड़ाई-झगड़े नहीं होंगे। उन्होंने लोगों से आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने की अपील की थी।

naya haryana

24 नवंबर 2017

नया हरियाणा

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे देवी सिंह तेवतिया का 90 वर्ष की आयु में गुरुवार को गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल में ब्रेन हेमरेज के कारण निधन हो गया। तेवतिया का अंतिम संस्कार दिल्ली के लोधी लिंक रोड नजदीक सीबीआई ऑफिस में अंतिम संस्कार किया गया। जाट समाज के प्रथम मुख्य न्यायाधीश देवी सिंह तेवतिया ने सबसे पहले जाटो में ओबीसी में आरक्षण के लिए अलख जगा कर पूर्व मुख्यमंत्री चौ हुकुम सिंह, ज्ञानप्रकाश पिलानिया, कर्नल ओपी संधू, सूबेदार राजमल धनाना, कमांडेंट हवा सिंह सांगवान, यशपाल मलिक आदि को साथ लेकर जाट आरक्षण संघर्ष समिति का निर्माण किया था।आपने बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों से खुद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। आप जीवनपर्यन्त जाट सभाओ, आरक्षण समिति, लीगल एसोसिएसन, सामाजिक संस्थाओं आदि से जुड़े रहे। सन्1930 में पलवल जिले के कौंडल गाँव में  देवीसिंह तेवतिया का जन्म हुआ था।

तेवतिया जी हथीन विधानसभा क्षेत्र से हरियाणा विधानसभा में प्रथम विधायक बने। हरियाणा बनने के बाद सन्1967 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर हथीन से विधायक रहे। बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत होकर और अधिकारियों की तरह घर न बैठ कर आप समाज सेवा में लगे। आपने जाटों को आरक्षण लेने हेतु जागरूक करने का काम किया. एक बार होली पर्व पर आपने कहा था कि आज समाज में जितने भी अपराध पनप रहे हैं, वो आपसी भाईचारे की कमी के कारण पनप रहे हैं। यदि आपस में एक-दूसरे के लिए इज्जत होगी तो लड़ाई-झगड़े नहीं होंगे। उन्होंने लोगों से आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने की अपील की थी। एक कार्यक्रम में बच्चों को संबोधित करते हुए कहा था कि केवल डिग्री हासिल करने से जीवन में सफलता नहीं मिलती। सफलता प्राप्ति के लिए डिग्री के साथ-साथ ज्ञान का होना भी जरूरी है।

सन् 2013 में जाटों को ओबीसी आरक्षण कोटे में शामिल किए जाने की मांग को लेकर जाट समाज के लोग 18 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन में सभी धर्मों के जाट शामिल हुए थे। संयुक्त जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एचपी सिंह परिहार व कोलकाता हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश देवी सिंह तेवतिया व अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति के अध्यक्ष भगत सिंह दलाल ने इसमें अहम् भूमिका निभाई थी। कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे देवी सिंह तेवतिया ने कहा था कि जाट अलग से आरक्षण की मांग नहीं कर रहे हैं। बल्कि जाट अपने को ओबीसी कोटे में शामिल किए जाने की मांग कर रहा है। ओबीसी कोटे में शामिल जातियों में ही जाट को शामिल किया जाना चाहिए।

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