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नया हरियाणा

बुधवार, 13 दिसंबर 2017

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कथनी-करनी के कर्मवीर यौद्धा छोटूराम को शत-शत नमन

दीनबंधु छोटूराम ने पलवल से लेकर पेशावर तक कानून बनाकर लगभग 8 लाख 35 हजार एकड़ जमीन साहुकारों से छुटवाकर लगभग 3 लाख 65 हजार किसानों को वापस देने का काम किया था,  किसानों के मसीहा दीनबन्धु छोटूराम को शत-शत नमन करते हैं. 

naya haryana

24 नवंबर 2017

नया हरियाणा

रहबर-ए-आजम, दीनबंधु,  चौधरी छोटूराम शारीरिक रूप से छोटे से कद के इस व्यक्ति के व्यक्तित्व का कद बहुत बड़ा था। वे दीन दुखियों, गरीबों के बंधु, रहबर-ए-आज़म, अंग्रेजी हुकूमत के लिये सर, तो किसानों के लिये चौधरी छोटूराम मसीहा थे. चौधरी छोटूराम का जन्म 24 नवंबर 1881 को हुआ था. आपका जन्म वर्तमान हरियाणा के झज्जर जिले के गांव गढ़ी सांपला में हुआ था. जो उस समय संयुक्त पंजाब का हिस्सा होता था. जो उस समय रोहतक के अंतर्गत पड़ता था. आपका वास्तविक नाम था- राय रिछपाल, लेकिन परिवार में सभी प्यार से छोटू कहकर पुकारते थे. फिर स्कूल के रजिस्टर में भी जाने-अंजाने आपका नाम छोटूराम ही दर्ज कर लिया गया और यहीं से बालक राय रिछपाल का वास्तविक नाम छोटूराम हो गया. यदि आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो जमीन तो आपके दादा रामरत्न के पास 10 एकड़ थी, लेकिन वह दस एकड़ आज की एक एकड़ जितनी पैदावार भी नहीं दे पाती थी. ऊपर से आपकी जमीन तो और भी बंजर व बारानी थी. आपके पिता बस नाम के ही सुखीराम थे, उनकी जिंदगी कर्ज और मुकदमों में ही उलझकर रह गई थी.

चौधरी छोटूराम की आरंभिक शिक्षा दस साल की उम्र में शुरु हुई. मीडिल तक झज्जर में पढ़े. छोटूराम पढ़ने में होशियार थे, आगे भी पढ़ना चाहते थे, लेकिन फीस व अन्य खर्चों की चिंता भी थी. पिता सलाह के लिये महाजन के यहां जा पंहुचे. उन्होंने कहा कि बहुत पढ़ लिया, कहीं पटवारी पटवूरी, सिपाही सीपूही की नौकरी दिला दे इसको. चौधरी छोटूराम ने इस तरह के व्यवहार से खुद को व अपने पिता को अपमानित महसूस किया. जैसे-तैसे अपने चाचा राजाराम की मदद से वे क्रिश्चियन मिशन स्कूल में आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिये दाखिल हो गये. आपकी कुशाग्र बुद्धि को देखकर वहां आपकी फीस भी माफ हो गई और छह रूपये प्रति माह छात्रवृति भी मिलने लगी. स्कूल के स्तर पर ही आपने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना शुरू कर दिया था.

सुना जाता है कि सेठ छाजू राम से  आपकी अचानक रेल में मुलाकात हो गई. उन्होंने आपकी पढ़ाई का खर्च वहन करने का वचन दिया. इसके बाद आप सैंट स्टीफन कॉलेज से स्नातक और उसके बाद दयानंद ऐंग्लो वैदिक कॉलेज से संस्कृत का ज्ञान लिया. इलाहाबाद के आगरा कॉलेज से आपने वकालत की पढ़ाई पूरी की. इस बीच कुछ समय तक आपने राजा रामपाल के यहां नौकरी भी की. हिंदुस्तान समाचारपत्र का संपादन भी किया. वकालत की शिक्षा पूरी करने के तुरंत बाद अभ्यास आरंभ कर दिया. यहीं से आपके राजनीतिक जीवन की शुरुआत भी हुई. जाट सभा का गठन, ‘जाट गजट’ नामक पत्र का प्रकाशन, रोहतक से कांग्रेस के प्रथम जिलाध्यक्ष यही बनें. सन् 1920 में असहयोग आंदोलन से असहमत होने के चलते कांग्रेस को अलविदा कह दिया.  ‘जमींदारा पार्टी’ खड़ी की, चुनाव भी जीते. सर सिकंदर हयात खान के साथ मिलकर यूनियनिस्ट पार्टी का गठन किया.

आप असहयोग आंदोलन को किसानों के हित में नहीं मानते थे. वे सांविधानिक रूप से अंग्रेजों के विरूद्ध लड़ाई लड़ने के पक्ष में थे. जब पंजाब के चुनाव में ‘युनियनिस्ट पार्टी’ को भारी बहुमत मिला और छोटूराम सरकार में राजस्व मंत्री बने तो उन्होंनें किसान, मजदूर व पीड़ित तबकों को राहत दिलाने के लिये कई कानून बनवाये. जैसे- साहूकार पंजीकरण एक्ट-1938, गिरवी जमीनों की मुफ्त वापसी एक्ट-1938, कृषि उत्पाद मंडी अधिनियम-1938, व्यवसाय श्रमिक अधिनियम-1940, कर्जा माफी अधिनियम-1934 आदि प्रमुख हैं. इसके अलावा भाखड़ा बांध परियोजना को सिरे चढ़ाने का श्रेय भी चौधरी छोटूराम को ही दिया जाता है.

वर्तमान दौर में चौधरी छोटूराम की विचारधारा का प्रचार-प्रसार बड़े स्तर पर किया जा रहा है और हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और यूपी आदि राज्यों में यूनियनिस्ट मिशन काफी सक्रिय है. आपकी विचारधारा और आपके बताए रास्ते पर आज काफी युवा चल रहे हैं और वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना अपने ढंग से कर भी रहे हैं. लेखक आर.एस.तोमर ने अपनी पुस्तक ‘किसानबंधु, चौधरी छोटूराम’ में लिखा है कि- “छोटूराम के बारे मे एक हरिजन विद्वान के उद्गार( श्री सोहनलाल शास्त्री , विधावाचस्पति , बी.ए., रिसर्च आफिसर ,राजभाषा (विधायी) आयोग, विधि मंत्रालय भारत सरकार) स्वर्गीय चौधरी छोटूराम जी मेरी दृष्टि में कर्मवीर यौद्धा के साथ-साथ महापुरुष भी थे. महापुरुष के लक्षण हैं जिस में दीन, दुःखी, दरिद्र और अन्याय पीड़ित जनसमुदाय के लिए पूर्ण सहानुभूति हो. वीर तो डाकू भी हो सकता है और कर्मवीर उसे कहा जाता है, जिसका जीवन केवल कथनी पर निर्भर न हो, करनी पर आधारित हो. एक कर्मवीर यौद्धा यदि अपने परिश्रम से कोई सिद्धि या निधि प्राप्त कर ले, किन्तु उस फल का उपभोग स्वयं ही करे या केवल अपने बंधुओ तथा सगे सम्बन्धियों को उसके उपभोग का पात्र ठहराए तो वह महापुरुष नहीं कहला सकता. चौधरी साहब का ह्रदय गरीब लोगों के लिए सदैव आर्द्र रहा.”

“चौधरी साहब वचन के पक्के और स्पष्ट वक्ता थे. चौधरी साहब कहा करते थे कि पंजाब का Land Alienation Act बेचारे किसान की ज़मीन को साहूकारों के फौलादी हाथ से बचाने के लिए ढाल है. यह एक्ट ऐसा लोहमय दुर्ग हैं, जिसमें साहूकार के अत्याचार से जमींदार का बचाव हो सकता है.”दीनबंधु  छोटूराम ने पलवल से लेकर पेशावर तक कानून बनाकर 8 लाख 35 हजार एकड़ जमीन साहुकारों से छुटवाकर 3 लाख 65 हजार किसानों को वापस देने का काम किया था,  किसानों के मसीहा दीनबन्धु छोटूराम को शत शत नमन करते हैं. 

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